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कविता

कहाँ गई निबिया जवान
पारस भ्रमर


हमरे अँगनवा न बोलै सुगनवा,
अँखिया मा सिसुकै परान।
कहाँ गयी निबिया जवान?

निबिया के बिरवा कटाय दिहौ बाबा,
घर की चिरैया उड़ाय दिहौ बाबा।
उड़िगै नयनवाँ सयान॥
कहाँ गयी निबिया जवान?

निबिया कै चिफुरी चइलिया कै अगिया,
जरि-जरि होइगै कोइलवा से रखिया।
लागै जहनवा मसान॥
कहाँ गयी निबिया जवान?

सूनी है पुरई, सूने हैं पुरवा,
सूनी देहरिया है, सूने दुवरवा।
सूने ओसरवा सिवान॥
कहाँ गयी निबिया जवान?

दुधवा कै खिरिया लै ओखै मतरिया,
भूले से कगवा न बोलै अँटरिया।
जइसे परनवा हेरान॥
कहाँ गयी निबिया जवान?


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