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कविता

लिबास
संदीप तिवारी


मेरी नजर में
ये लिबास...
कुछ भी नहीं,
जो भी है
बस एक समझौता है...
सुई-धागे
और दो पनीली व नंगी आँखों में...!


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हिंदी समय में संदीप तिवारी की रचनाएँ