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कविता

‘देव’ मैं सीस बसायो सनेह कै
देव


'देव' मैं सीस बसायो सनेह कै, भाल मृगम्मद-बिंदु कै राख्यौ।
कंचुकि में चुपरयो करि चोवा, लगाय लियो उर सौं अभिलाख्यौ।
लै मखतूल गुहे गहने, रस मूरतिवंत सिंगार कै चाख्यौ।
साँवरे लाल को साँवरो रूप में, नैननि को कजरा करि राख्यौ।।


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हिंदी समय में देव की रचनाएँ