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कविता

नई शुरुआत
डॉ. भारत खुशालानी


चलो वह सब कुछ पीछे छोड़ दें
जीवन की राह अब दूसरी ओर मोड़ दें
समय सब घाव भर देगा,
पुराने दोषों को निष्प्रभाव कर देगा
यह बात समय खुद ही सिद्ध कर देगा
विश्वास को मन में विद्ध कर देगा
अब समय आ गया है आगे देखने का,
कूड़े-कर्कटों को फेंकने का,
मजबूत इरादों को बाँधने का
सर के बोझ हटाने का
वह सब करने का समय आ गया है
जिसके लिए हमें यहाँ पर लाया गया है
हालचाल पूछें उनसे जो हैं सच्चे साथीगण
सब ठीक हो जाएगा, सब होगा विरोहण
एक नई जिंदगी की शुरुआत करें
अपनी खुद की जिंदगी की बात करें
पीछे मुड़कर देखना नहीं है
पुरानी यादों को घोखना नहीं है


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