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‘लोकल टू ग्लोबल’ का पक्षधर है सामुदायिक रेडियो
उमा यादव


'रेडियो की ध्वनि-तरंगें नीले आसमान में उड़ने वाले परिदों की मानिंद हैं। मानवता के विकास की अनंत संभावनाओं के द्वार जिस दिशा में खुलते हैं, रेडियो के प्रसारणकर्ता उस ओर अग्रसर हैं।' - तुर्की कवि नाज़िम हिकमत

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बने नए राष्ट्र-राज्यों पर तथाकथित विकास के नाम पर कब्जे की होड़ शुरू हुई। यह होड़ व्यापार आयात-निर्यात, संधि जैसी शर्तों के माध्यम से शुरू हुई। इस होड़ को बढ़ावा देने में महती भूमिका अदा की संचार माध्यमों ने! प्रारंभिक दौर रेडियो पर आश्रित था, संभवतः ऐसा इसलिए था कि विश्वयुद्ध की गाज विकासशील राष्ट्रों पर पड़ी थी। यह राष्ट्र सूचनातंत्र का हिस्सा अब तक नहीं बने थे। अतः आवश्यकता थी, इन्हें सरल लेकिन सस्ते जनमाध्यम से जोड़ने की। यही कारण था कि तीसरी दुनिया के देशों में रेडियो को स्थापित करने का कार्य किया विकसित देशों ने।

भारत भी इससे अछूता नहीं था। मैकब्राइड कमीशन की रिपोर्ट में यह स्पष्ट उल्लेखित है, कि - संयुक्त राष्ट्र संघ का मुख्य हिस्सा संयुक्त राष्ट्र शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति संघ ने विकासशील देशों में मुक्त सूचना प्रवाह और विकास के नाम पर विकसित देशों के लिए व्यावसायिक जगह बनानी शुरू की। तीसरी दुनिया के देशों में मुक्त सूचना प्रवाह का अभियान रेडियो के माध्यम से ही प्रारंभ हुआ। यूनेस्को का मुख्य ध्येय था विकसित देशों के लिए विकासशील देशों में संचार तकनीक का व्यापार तैयार करना। यही कारण था कि यूनेस्को ने बड़ा बजट सामुदायिक रेडियो के नाम पर व्यय करना प्रारंभ किया। भारत में भी सामुदायिक रेडियो यूनेस्को के प्रयासों का ही परिणाम है। लेकिन भारत जैसे विविधता एवं बहुलता वाले देश के लिए सामुदायिक रेडियो वरदान साबित हुआ।

समुदाय की योग्यताओं का उचित दोहन कैसे किया जाए? जो समाज, राज्य, देश एवं विश्व के हित में हो। स्थानीय समस्याओं का समाधान, संस्कृति का संरक्षण, रीति-रिवाजों का संरक्षण, सामुदायिक सभ्यता का संरक्षण सामुदायिक कला का संरक्षण, सामुदायिक लोकसंगीत का संरक्षण, सामुदायिक मूल्यों का संरक्षण राज्य स्तरीय मुद्दों पर विचार विमर्श - अपने समुदाय की प्रस्थिति, जनसंख्या, समुदाय का राज्य के विकास में योगदान, खनिज संपदा का संरक्षण, समुदाय के लिए बनी नीतियों की जानकारी, समुदाय के सशक्तिकरण में योगदान किसी भी समुदाय के स्थानीय मुद्दे हो सकते हैं। समुदाय के युवा अथवा बुजुर्गों की समस्या के लिए सामुदायिक रेडियो सर्वथा उचित माध्यम है, क्योंकि सामुदायिक रेडियो द्वारा प्रसारित कार्यक्रमों का लक्ष्य होता है, समुदाय विशेष को -

• जागरूक करना।
• आत्मनिर्भर बनाना।
• सूचना का निरंतर प्रवाह बनाना।
• समय-समय पर आवश्यक जानकारियों को दोहराना।

सामुदायिक रेडियो समुदाय को जागरूक कर लोकतांत्रिक गणराज्य का हिस्सा बनाने में सहायता करता है। आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक गतिविधियों के प्रति विचार विकसित करने में सामुदायिक रेडियो की मुख्य भूमिका रही है। वैश्विक मुद्दों जैसे पर्यावरण, सीमावर्ती युद्ध, नवान्वेषण इत्यादि के प्रति जागरूक करने का मुख्य माध्यम भी सामुदायिक रेडियो बना है।

सामुदायिक रेडियो का सिद्धांत है -

सहभागिता - सामान्यतः मीडिया के विभिन्न माध्यमों में एकतरफा संचार होता है। सामुदायिक रेडियो में जिस समुदाय द्वारा अथवा जिस समुदाय के लिए रेडियो संचालित किया जाता है उसकी संपूर्ण सहभागिता होती है। आयु, लिंग अथवा सामाजिक विकार समुदाय की सहभागिता में बाधक नहीं बनते।

स्वतंत्रता - समुदाय विशेष अपने विचारों को व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र होता है। सामुदायिक रेडियो में समुदाय अपने सामुदायिक विषयों की प्रस्तुति हेतु स्वतंत्र होता है। यह ऐसा संचार मंच है, जहाँ सामुदायिक समस्याएँ, सामुदायिक तथ्य, सामुदायिक व्यवस्था, सामुदायिक विकास, इत्यादि पर विचार विमर्श होता है।

समानता - सामुदायिक रेडियो के द्वारा समाज का कोई भी वर्ग भागीदार बन सकता है। आयु, जाति, वर्ग, लिंग, धर्म अथवा प्रजाति के आधार पर सामुदायिक रेडियो विभेद नहीं करता।

स्वायत्तता - सामुदायिक रेडियो कार्यक्रमों के प्रसारण में स्वायत्त है। सामुदायिक रेडियो, जनता का रेडियो जनता के लिए रेडिया, जनता के द्वारा संचालित रेडियो के सिद्धांत पर कार्य करता है।

सत्यता - सामुदायिक रेडियो के माध्यम से सत्यपरक कार्यक्रमों का प्रसारण किया जाता है। व्यावसायिक मीडिया की तुलना में सामुदायिक रेडियो सत्यता के अधिक निकट होता है। सामुदायिक मीडिया के संचार का मूलभूत आधार ही होता है - सत्यता का प्रसारण।

सामाजिक सरोकार - सामुदायिक रेडियो सनसनी अथवा ब्रेकिंग न्यूज में रुचि नहीं रखता। यह सॉफ्ट न्यूज अथवा सॉफ्ट कार्यक्रमों में रुचि रखता है। प्रायः सामाजिक सरोकार के मुद्दे इसके अग्रिम श्रेणी के कार्यक्रम होते हैं।

संरक्षण - सामुदायिक रेडियो समुदाय विशेष की सामुदायिक संस्कृति, सामुदायिक बोली अथवा भाषा, सामुदायिक रहन-सहन को संरक्षित करने में सहायक सिद्ध हुआ है।

वर्तमान समय में सामुदयिक रेडियो उपर्युक्त सिद्धांतों के अनुसार ही प्रसारित हो रहे हैं जिनमें प्रमुख हैं ‌-

• आंध्र प्रदेश से प्रसारित सामुदायिक रेडियो अला गोदावरी नदी के किनारे बसी मछुआरों की संस्कृति को सहेजने का कार्य कर रहा है। इस रेडियो के माध्यम से मछुआरे अपनी समस्याओं का निदान प्रत्यक्ष रूप से कलेक्टर से बात करके निकालते हैं।

• असम से प्रसारित ब्रह्मपुत्र सामुदायिक रेडियो केंद्र यूनिसेफ की सहायता से संचालित किया जा रहा है इसके माध्यम से स्वास्थ्य, महिला, पर्यावरण, कृषि इत्यादि के संरक्षण हेतु कार्य कर रहा है। इस रेडियो को असमी में प्रसारित किया जाता है।

• बिहार के पटना से प्रसारित केवीके सामुदायिक रेडियो कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा संचालित किया जा रहा है। इसका मुख्य कार्य किसानों की प्रतिदिन की जीवनचर्या से संबंधित कार्यक्रमों का प्रसारण करना है।

• चंडीगढ़ से प्रसारित ज्योति ग्राम्या सामुदायिक रेडियो केंद्र पंजाब विश्वविद्यालय के संरक्षण में प्रसारित हो रहा है। इस रेडियो के माध्यम से चंडीगढ के आस-पास के 22 गाँवों में स्वास्थ्य, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों से संबंधित कार्यक्रम प्रसारित किया जाता है। यह सामुदायिक रेडियो पंजाबी भाषा में प्रसारित होता है। इसके मुख्य कार्यक्रमों में हमारी बेटी, कानून और आप, हमारा समाज मुख्य है।

• दिल्ली से प्रसारित अपना सामुदायिक रेडियो इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन द्वारा संचालित किया जा रहा है। यह रेडियो विद्यार्थियों के विचारों को मंच प्रदान करता है। इस रेडियो के माध्यम से समाज, शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर आधारित कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं। कुछ कहना है, अपने आस-पास इत्यादि रेडियो के मुख्य कार्यक्रमों में शामिल है जिसके माध्यम से सामुदायिक रेडियो लोगों में जागरूकता का प्रसार कर रहा है। यह रेडियो हिंदी एवं अँग्रेजी भाषा में प्रसारित होता है।

• गुजरात के जूनागढ़ से प्रसारित जनवाणी सामुदायिक रेडियो केंद्र जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय द्वारा संचालित किया जा रहा है। इस रेडियो के माध्यम से किसानों में जागरूकता का प्रचार-प्रसार किया जाता है। यह रेडियो गुजराती में प्रसारित होता है।

• हरियाणा से प्रसारित अल्फाज ए मेवात सामुदायिक रेडियो मेवात जिले के 225 ग्रामीण समुदायों की आवाज बन गया है। शौचालय मेरे अँगना, तोहफा ए कुदरत, जल जंगल जमीन इसके मुख्य कार्यक्रम हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से यह सामुदायिक रेडियो ग्रामीण जनमानस में जागरूकता एवं सशक्तिकरण का कार्य कर रहा है।

• कर्नाटक से प्रसारित सिद्धार्थ सामुदायिक रेडियो हाशिए के लोगों की आवाज बन कर उभरा है। इस रेडियो के माध्यम से हाशिए के समाज को शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, जीविकोपार्जन हेतु जागरूक किया जा रहा है। नम्मा दिशा नम्मा संविधान, कृषि कनजा, शिक्षा वाणी इसके मुख्य कार्यक्रम है। यह रेडियो कन्नड़ में प्रसारित होता है

• केरल से प्रसारित जनवाणी सामुदायिक रेडियो समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त कर रहा है। इस रेडियो के माध्यम से ग्रामीण विकास हेतु कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं। यह रेडियो मलयालम भाषा में प्रसारित होता है। इसके मुख्य कार्यक्रम हैं - जनशब्दम, विद्या वन इत्यादि।

• मध्य प्रदेश के चांडा से प्रसारित सामुदायिक रेडियो वन्य प्रधान जनजाति को मुखर करने के लिए संचालित किया जा रहा है। यह सामुदायिक रेडियो केंद्र बेगानी बोली में प्रसारित किया जाता है। इस रेडियो के माध्यम से जनजातीय संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। आदिवासी संस्कृति को संरक्षित करने के लिए सामुदायिक रेडियो से लोकगीत इत्यादि प्रसारित किए जाते हैं। 'जानकारी आपके द्वार' इसका मुख्य कार्यक्रम है।

• महाराष्ट्र के वर्धा से प्रसारित एमगिरी सामुदायिक रेडियो वर्धा जिले में महात्मा गांधी इन्स्टिट्यूट फॉर रूरल इंडस्ट्रियलईजेशन एमगिरी द्वारा संचालित किया जाता है। यह सामुदायिक रेडियो किसानों के लिए कृषि से संबंधित उन्नत तकनीकों का प्रयोग कैसे किया जाए? इत्यादि से संबंधित कार्यक्रम प्रसारित करता है। साथ ही छोटे उद्योगों को उन्नत तकनीक के साथ विकसित करने के तरीके भी इस रेडियो के माध्यम से प्रसारित किए जाते हैं। एमगिरी सामुदायिक रेडियो मराठी भाषा में कार्यक्रम प्रसारित करता है।

• उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से प्रसारित सामुदायिक रेडियो पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, गाजीपुर द्वारा संचालित किया जाता है। इस सामुदायिक रेडियो के माध्यम से पशुपालन, कृषि इत्यादि के विकास हेतु कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं। कृषि चर्चा, कॉलेज डायरी इसके मुख्य कार्यक्रम हैं। यह सामुदायिक रेडियो भोजपुरी में प्रसारित होता है।

बेशक सामुदायिक रेडियो समुदाय को जागरूक करने में सबकुछ तो नहीं लेकिन बहुत कुछ कर सकता है। समुदाय को स्वतंत्रता प्रदान कर दबाव रहित माध्यम बनता है, सामुदायिक रेडियो। विशुद्ध मनोरंजन, अलाभकारी प्रसारण सामुदायिक रेडियो की विशिष्टता है। यह समुदाय के प्रचार-प्रसार का ही माध्यम नहीं है, बल्कि ऐसा मंच भी है, जहाँ स्वछंद भाव से समुदाय अपने विचार, विमर्श हेतु प्रस्तुत कर सकता है। संवाद की गूँज सामुदायिक रेडियो के माइक से प्रवाहित होकर कमजोर वर्गों में सूचना शक्ति का प्रवाह करती है। सामुदायिक रेडियो के कार्यक्रम समुदाय विशेष के लिए प्रसारित किए जाते हैं? समुदाय का निमार्ण समुदाय में रहने वाले बच्चों से लेकर स्त्रियों, पुरुषों, बुजुर्गों अथवा युवाओं से होता है। प्रत्येक वर्ग की समझ एवं उसका कार्यक्रमों के प्रति रुझान भिन्न होता है। ऐसे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों का ध्यान सामुदायिक रेडियो हेतु कार्यक्रमों के निर्माण में रखा जाना चाहिए। जैसे -

• सांस्कृतिक पक्ष
• व्यक्तिगत पक्ष
• सामुदायिक पक्ष

सामुदायिक रेडियो के प्रसारण का उद्देश्य

• लोकतांत्रिक देश की एकता एवं अखंडता में योगदान देना।
• राष्ट्र, राष्ट्रीय प्रतीकों, राष्ट्रीय लोककलाओं इत्यादि को प्रसारण के माध्यम से प्रोत्साहन देना।
• देश के विकास में जागरूक नागरिक के रूप में योगदान देने योग्य बनाना।
• जानकारियों, दृष्टिकोण एवं कुशलता का विकास कर सक्षम नागरिक बनने में सहयोग करना।
• समुदाय अथवा सामान्य जन एवं प्रशासन एवं शासन के मध्य की दूरियों को समाप्त करना।
• कुशल उद्यमी बनने हेतु प्रोत्साहित करना।
• समुदाय के पिछड़े वर्ग अथवा हाशिये पर खड़े लोगों की आवाज को प्रमुखता देना।
• सामाजिक गतिविधियों के प्रति भागीदारी हेतु उत्साहित करना।
• सामुदायिक कुरीतियों के प्रति जागरूक करना एवं अंधविश्वास को समाप्त करने की पहल करना।
• स्वास्थ्य, शिक्षा, विज्ञान एवं तकनीक की जानकारी प्रदान करना।
• विकास एवं आधुनिकीकरण में योगदान देना।

किसी भी सामुदायिक रेडियो को अपने कार्यक्रम प्रसारित करते समय ध्यान रखना चाहिए कि -

• सामुदायिक रेडियो समुदाय विशेष की आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यक्रम प्रसारित कर रहा है, अथवा नहीं।
• समुदाय की भाषा ही समुदाय के लिए संचार का माध्यम होनी चाहिए।
• सामुदायिक रेडियो से प्रसारित हो रहे कार्यक्रमों की विषय-वस्तु एवं चर्चा के मुद्दे समुदाय विशिष्ट से संबंधित होने चाहिए।
• कार्यक्रम के प्रस्तुतीकरण की शैली समुदाय के अनुकूल होनी चाहिए।
• सामुदायिक रेडियो के कार्यक्रमों की समुदाय के मध्य विश्वसनीयता होनी चाहिए।
• समुदाय की आवश्यकताओं की पहचान कर कार्यक्रम का प्रसारण होना चाहिए।
• सामुदायिक रेडियो को इस बात का ध्यान रखना चाहिए, कि रेडियो स्टेशन से कुल प्रसारित समय का 20 प्रतिशत समय समाचार एवं आवश्यक जानकारियों के कार्यक्रमों हेतु, 30 प्रतिशत ज्ञान वृद्धि से सबंधित कार्यक्रमों के लिए एवं 50 प्रतिशत समय गीत-संगीत के कार्यक्रमों के लिए आवंटित होना चाहिए।
• कार्यक्रम की शुरुआत प्रेरक विषय से होनी चाहिए।

सामुदायिक रेडियो के प्रसारण का मुख्य आधार ही समुदाय की सहभागिता पर आधारित कार्यक्रम होते हैं। सामुदायिक रेडियो से मुख्यतः दो तरह के कार्यक्रम प्रसारित होते हैं -

1. फोन आधारित कार्यक्रम - सामुदायिक रेडियो इंटरेक्टिव मीडिया है। जहाँ संचार दोतरफा होता है। फोन आधारित कार्यक्रमों में विषय आधारित फोन कार्यक्रम, सामाजिक विषयों पर आधारित फोन कार्यक्रम, श्रोता की ओर से कार्यक्रम प्रस्तुतकर्ता को एवं कार्यक्रम प्रस्तुतकर्ता की ओर से श्रोताओं को फोन इत्यादि कार्यक्रम शामिल हैं।

2. पत्र आधारित कार्यक्रम - पत्र आधारित कार्यक्रमों से श्रोताओं की सामूहिक रुचि का ज्ञान हो जाता है। साथ ही श्रोताओं के पत्रों से रेडियो पर प्रसारित कार्यक्रमों के प्रति जनमत का पता लगता है। इसके अतिरिक्त ऑडियंस की कार्यक्रम की शैली एवं विषय वस्तु के प्रति अभिमत का ज्ञान होता है।

निष्कर्ष स्वरूप हम कह सकते हैं, कि सूचना और तकनीकी के इस युग में सामुदायिक रेडियो जागरूकता का पर्याय बन रहा है। आवश्यकता है सामुदायिक रेडियो के प्रचार एवं प्रसार की, जिससे अच्छे परिणाम सामने आ सकें। हमारे देश के बारे में कहा जाता है, कि कोस-कोस पर बदले पानी, चार कोस पर वाणी। इसी तरह अगर हम हर चार कोस पर सामुदायिक रेडियो स्टेशन की फ्रीक्वेंसी बदलने में सफल हो जाएँ तो भारत को विकसित देश बनते देर नहीं लगेगी। सामुदायिक विकास 'बॉटम टू अप' अर्थात सामुदायिक सहभागिता एवं स्थानीय सशक्तिकरण से ही संभव है, जिसे सामुदायिक रेडियो अर्थात 'लोकल टू ग्लोबल' संचार के द्वारा सहज ही प्राप्त किया जा सकता है।

संदर्भ

1. मैनाली, रघु. (2008). रेडियो प्लेज. नेपाल : सीआरएससी.
2. चौधरी, उमा शंकर. (2008). हाशिये की वैचारिकी. नई दिल्ली : अनामिका पब्लिशर्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स
3. सिंह, अजय कुमार. (2007). मीडिया इतिहास और हाशिये के लोग. हरियाणा : आधार प्रकाशन
4. Mainali, Raghu.(2008). Community radio : principles & prospects. CRSC/NEFEJ: Nepal


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