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आत्मकथा

मेरी आत्मकथा
चार्ली चैप्लिन

अनुवाद - सूरज प्रकाश


बेवरली हिल्स में वापिस आने पर मुझे एक न्यौता मिला कि मैं अपने एक दोस्त के यहां मिस गर्टरूड स्टेन से मिलूं। जब मैं वहां पर पहुंचा तो मिस स्टेन ड्राइंग रूम के बीचों बीच एक कुर्सी पर बैठी हुई थीं। उन्होंने भूरी ड्रेस पहनी हुई थी और लेस कॉलर लगा रखा था। उनके हाथ गोद में थे। किसी वज़ह से वे मुझे वान गॉग के पोर्टरेट मैडम रॉलिन जैसी लगीं, बस फर्क सिर्फ यही था कि लाल बालों के जूड़े के बजाये गर्टरूड के छोटे कटे हुए भूरे बाल थे।

मेहमान उनके चारों तरफ सम्मानित दूरी बनाये रखते हुए एक घेरे में खड़े हुए थे। मेज़बान की बांदी गर्टरूड के कानों में कुछ फुसफुसायी और फिर मेरे पास आयी,"मिस गर्टरूड स्टेन आपसे मिलना चाहेंगी।" मैं आगे बढ़ा। उस वक्त उनसे बात कर पाने के बहुत ही कम मौके थे क्योंकि और लोग आ रहे थे और परिचय कराये जाने का इंतज़ार कर रहे थे।

लंच पर मेजबान ने मुझे उनके साथ वाली कुर्सी पर बिठाया। हमारी बातचीत का विषय पता नहीं कैसे कला की तरफ मुड़ गया। मेरा ख्याल है इसकी शुरुआत डाइनिंग रूम से दिखायी देते नज़ारे की मेरे द्वारा तारीफ करने से हुई। लेकिन गर्टरूड स्टेन ने कोई उत्साह नहीं दिखाया,"प्रकृति," उन्होंने कहा,"साधारण बात है, नकल ज्यादा रोचक होती है।" उन्होंने अपनी बात को विस्तार देते हुए कहा कि नकली संगमरमर वास्तविक संगमरमर की तुलना में ज्यादा सुंदर दिखता है। और कि चित्रकार टर्नर का सूर्यास्त किसी भी वास्तविक आसमान की तुलना में ज्यादा प्यारा है। हालांकि उनकी ये दलीलें कुछ हद तक कोफ्त दिलानेवाली थीं, मैं विनम्रता पूर्वक उनसे सहमत होता रहा।

उन्होंने सिनेमा प्लॉट के बारे में अपनी राय रखी,"ये बहुत ही घिसे पिटे, जटिल और बनावटी लगते हैं।" वे मुझे किसी फिल्म में बस, किसी गली में चलते हुए फिर किसी कोने पर मुड़ते हुए और एक और गली में फिर एक और गली में मुड़ते हुए देखना पसंद करेंगी।

मैंने ये कहने के बारे में सोचा कि उनके विचार उन्हीं की रहस्यवादी जुमलेबाजी वाले शब्दों की कलाबाजी है। मैं कहना चाहता था,"गुलाब गुलाब है, गुलाब है गुलाब।" लेकिन मेरी भीतरी प्रेरणा ने मुझे रोक दिया।

लंच बहुत ही खूबसूरत बेल्जियन लेस वाले मेजपोश पर परोसा गया था और इस मेजपोश की सभी मेहमानों ने खुल कर तारीफ की। हमारी गपशप के दौरान कॉफी बहुत ही हल्के, लाख के बने कपों में परोसी गयी थी और मेरा कप मेरी बांह के इतना नज़दीक रख दिया गया कि मैंने ज्यों ही अपना हाथ ज़रा सा हिलाया, कॉफी का प्याला डगमगाया और कॉफी मेजपाश पर छलक गयी। मेरी तो जैसे जान ही निकल गयी! मैं अपनी मेजबान से बार बार माफी मांगे जा रहा था कि तभी गर्टरूड स्टेन ने भी कमोबेश वही किया जो मैंने किया था। अपनी कॉफी का प्याला लुढ़का दिया। मुझे भीतर ही भीतर राहत मिली, क्योंकि अब मैं अपनी परेशानी में अकेला नहीं था। लेकिन गर्टरूड स्टेन ने एक बार भी अफसोस नहीं किया। उन्होंने कहा,"कोई बात नहीं, हो जाता है। शुक्र है ये मेरी पोशाक पर नहीं गिरी।"

जॉन मेसफील्ड स्टूडियो में आये। वे लम्बे, आकर्षक, सज्जन, दयालु और समझ बूझ रखने वाले शख्स थे। लेकिन उनके इन्हीं गुणों के कारण मैं उनसे झेंप महसूस कर रहा था। सौभाग्य से मैंने अभी हाल ही में उनकी किताब द विडो इन द बाइ स्ट्रीट पढ़ी थी जिसे मैंने सराहा था, इसलिए मैं पूरी तरह से गूंगा भी नहीं बना हुआ था। मैंने उसमें से अपनी कुछ प्रिय पंक्तियां सुनायीं:

वहां थे कुछ लोग जेल के दरवाजे के बाहर

बजने वाली घंटी की आवाज़ सुनने को बेताब

इंतजार में

वैसा ही इंतजार जैसा खाली लोग करते रहते हैं: इंतजार

दूसरे के नरक के तीखे जहर के लिए।

द गोल्ड रश के निर्माण के दौरान मुझे एलिनॉर ग्लिन की तरफ से एक टेलीफोन आया: मेरे प्यारे चार्ली, आपको मैरियन डेविस से ज़रूर मिलना चाहिये: वे सचमुच बहुत ही प्यारी शख्सियत हैं और तुमसे मिल कर बहुत खुश होगीं, इसलिए तुम एम्बेसेडर होटल में हमारे साथ खाना खाओगे और उसके बाद हमारे साथ पसाडेना चलोगे जहां पर हम तुम्हारी फिल्म द आइडल क्लास देखेंगे।

मैं मैरियन डेविस से कभी नहीं मिला था। लेकिन उनके धूंआधार प्रचार से वाकिफ था। वे हर्स्ट के सभी अखबारों में और पत्रिकाओं में छायी रहतीं और उनकी पूरे पेज की तस्वीर छपती थी। ये सब कोफ्त पैदा करता। उस समय ये प्रचार इतना ज्यादा हो चला था कि मैरियन डेविस कई लतीफों के केन्द्र में आ गयी थीं। एक बार बिट्रीस लिली ने एक मज़ेदार लतीफा उन पर कह दिया था। जब उन्हें किसी ने लॉस एंजेल्स की झुंड की झुंड बत्तियां दिखायी थीं तो वे बोलीं,"हाय कितनी शानदार," बिट्रीस ने कहा, "मेरा ख्याल है कि बाद में ये बत्तियां आपस में मिल जायेंगी और उनमें मैरियन डेविस का नाम पढ़ा जा सकेगा।"

हर्स्ट की कोई भी पत्रिका या अखबार ऐसा नहीं था जिसे खोलने पर मैरियन डेविस की बड़ी सी तस्वीर नज़र न आये। इन सारी बातों ने जनता को बॉक्स ऑफिस से दूर ही रखा।

लेकिन एक दिन फेयरबैंक्स दम्पत्ति ने मैरियन डेविस की फिल्म वैन नाइटहुड वाज ए फ्लावर चला दी थी। मैं ये देखकर हैरान हुआ कि वे काफी हद तक कॉमेडी कर लेती हैं, उनमें आकर्षण और अपील थे, और वे हर्स्ट के तूफानी प्रचार के बिना भी अपने बलबूते पर स्टार बन सकती थीं। एलिनॉर ग्लिन के यहां डिनर पर मैंने उन्हें सादगीपूर्ण और आकर्षक पाया और उसके बाद से हम दोनों में दांत काटी दोस्ती वाला मामला हो गया।

हर्स्ट और मैरियन के बीच संबंध युनाइटेड स्टेट्स में मिथक बन गये थे और शायद पूरी दुनिया के लिए भी। उनके बीच तीस बरस का लम्बा संग साथ रहा और हर्स्ट की मृत्यु के दिन तक चलता रहा।

अगर मुझसे पूछा जाये कि वह कौन सा व्यक्तित्व है जिसने मेरे जीवन पर सबसे गहरा प्रभाव छोड़ा है तो मैं कहूंगा, स्वर्गीय विलियम रैंडोल्फ हर्स्ट। मैं ये बताना चाहूंगा कि ये असर हमेशा ही सुखद नहीं था, हालांकि उनमें अनुकरणीय गुण थे। ये उनके व्यक्तित्व की पहेली थी जो मुझे अभिभूत करती थी। उनका लड़कपन, उनकी काइयांपन, उनकी दयालुता, उनका अक्खड़पन, उनकी बेइंतहां ताकत और दौलत, और सबसे बड़ी बात, उनकी असली सहजता। सांसारिक मूल्यों से देखें तो वे इतने स्वतंत्र व्यक्ति थे जैसा मैंने आज तक नहीं देखा। उनका कारोबारी साम्राज्य विपुल और विविधता लिये हुए था। उनके सैकड़ों प्रकाशन, न्यू यार्क भू संपदा में बहुत बड़ी-बड़ी ज़मीनें, खनन, और मैक्सिको में बहुत बड़े-बड़े प्लॉट थे। उनके सचिव ने मुझे बताया था कि हर्स्ट की सम्पत्ति 400,000,000 डॉलर के आस-पास थी और उन दिनों ये बहुत बड़ी दौलत हुआ करती थी।

हर्स्ट के बारे में विरोधाभासी अभिमत थे। कुछ लोगों का मानना था कि वे सच्चे अमेरिकी देशभक्त थे, जबकि कुछ अन्य लोगों की राय थी कि वे अवसरवादी थे और मात्र अपने अखबारों की प्रसार संख्या बढ़ाने और अपना साम्राज्य बढ़ाने में ही रुचि रखते थे। लेकिन जब वे युवा थे तो वे रोमांचकारी और उदार थे। इसके अलावा, उन्हें अपने माता-पिता से भी विरासत में बहुत कुछ मिला था। एक किस्सा चलता है कि वित्तपोषक रसेल सेज, हर्स्ट की मां फोबे हर्स्ट से फिफ्थ एवेन्यू में मिले। कहा उन्होंने,"अगर आपका बेटा वॉल स्ट्रीट पर अपने हमले करना जारी रखेगा तो उसके अखबार को हर साल दस लाख डॉलर का नुक्सान उठाना पड़ेगा।"

"इस दर से तो, मिस्टर सेज, वह कारोबार में अगले अस्सी बरस तक रह सकता है," उनकी मां ने जवाब दिया।

मैं जब पहली बार हर्स्ट से मिला तो मैं एक बड़ी गलती कर बैठा। साइम सिल्वरमैन, वेराइटी के प्रकाशक और संपादक मुझे हर्स्ट के रिवरसाइड ड्राइव वाले अपार्टमेंट में लंच के लिए ले गये। ये एक परम्परागत अमीर आदमी का घर था, डुप्ले किस्म का घर, उसमें लगी हुई दुर्लभ पेंटिंग्स, महोगनी के पैनल और दीवार में ही बने हुए शो केस जिनमें पोर्सलीन की वस्तुएं रखी हुई थीं। जब हर्स्ट परिवार से मेरा परिचय करा दिया गया तो हम सब खाना खाने के लिए बैठे।

मिसेज हर्स्ट एक आकर्षक महिला थीं और उनके तौर-तरीके में दयालुता और गरिमा थी। जबकि दूसरी तरफ हर्स्ट की आंखें बड़ी-बड़ी थीं और वे उस तरह के व्यक्ति थे जो सारी बातें मैं ही करूंगा प्रकार में आते हैं।

"जब मैं आपसे पहली बार मिला मिस्टर हर्स्ट," मैंने कहा,"ये बीऊ आर्ट्स रेस्तरां की बात है, आप वहां पर दो महिलाओं के साथ बैठे हुए थे। आपकी तरफ मेरे एक दोस्त ने इशारा किया था।"

मेज के नीचे मैंने अपने पैर पर दबाव महसूस किया। मैंने अंदाजा लगाया कि ये पैर सिल्वरमैन का है।

"आह," हर्स्ट ने चेहरे पर मज़ाकिया भाव लाते हुए कहा।

मैं अब गड़बड़ाने लगा,"मेरा ख्याल है, वो आप नहीं थे, ज़रूर कोई और रहा होगा जिसकी शक्ल आप से मिलती-जुलती होगी। बेशक मेरे दोस्त को भी पूरी तरह से यकीन नहीं था।" मैंने भोलेपन से कहा।

"हां, हो जाता है," हर्स्ट ने अपनी आंखों में चमक लाते हुए कहा,"एक जैसी शक्ल के दो व्यक्ति दिखायी दे जाना बहुत मामूली बात है।"

"हां," मैं हँसा, शायद कुछ ज्यादा ही ज़ोर से।

मिसेज हर्स्ट ने मुझे उबारा,"हां," उन्होंने मज़ाकिया तरीके से ज़ोर दिया,"ये बहुत ही मामूली बात है।"

अलबत्ता, ये बात आयी-गयी हो गयी और मेरा ख्याल है, लंच ठीक-ठाक निपट गया।

मेरियन डेविस हॉलीवुड में हर्स्ट कॉस्मापालिटन प्रोडक्शन की फिल्मों में काम करने के लिए आयी थीं। उन्होंने बेवरली हिल्स पर किराये पर एक मकान लिया और हर्स्ट अपना दो सौ अस्सी फुट का क्रूज़र पैनामा नहर से होते हुए कैलिफोर्निया वाटर्स में ले आये। उसके बाद तो फिल्म कॉलोनी की बन आयी। वहां पर अरेबियन नाइट्स युग का स्वर्ग उतर आया। हफ्ते में दो या तीन बार मैरियन बहुत बड़े पैमाने पर डिनर पार्टियां देतीं जिसमें कई-कई बार तो सौ-सौ मेहमान होते। उनमें अभिनेता, अभिनेत्रियां, सिनेटर, पोलो खिलाड़ी, कोरस गाने वाले लड़के, विदेशी राजनयिक, और हर्स्ट के उच्च अधिकारी, संपादकीय स्टाफ से ले कर सबसे नीचे के स्तर के स्टाफ का भी मेला लगता। उस वक्त वहां पर तनाव और ओछेपन का देखने लायक आलम होता क्योंकि कोई भी सर्वशक्तिमान हर्स्ट के तापमान के बारे में पूर्वानुमान नहीं लगा सकता था। उनका बैरोमीटर ही यह तय करता था कि शाम अच्छी गुज़रेगी या नहीं।

मुझे मेरियन द्वारा अपने किराये के घर में दिये गये डिनर की एक घटना याद आती है। हम लगभग पचास के करीब मेहमान इंतज़ार कर रहे थे और जनाब हर्स्ट अपने संपादकीय स्टाफ से घिरे कमरे में ऊंची पीठ वाली कुर्सी पर मनहूस चेहरा बनाये बैठे हुए थे। मेरियन एक सेट्टी पर पसरी किसी महारानी की तरह गाउन में सजी, बेहद खूबसूरत नज़र आ रही थीं, लेकिन हर्स्ट जिस तरह से अपने कारोबार में उलझे हुए थे, उससे और अधिक चुप्पा होती जा रही थीं।

अचानक ही मेरियन नाराज़गी से चिल्लायीं,"ऐय आप?"

हर्स्ट ने सिर उठाया,"क्या आप मुझसे कुछ कह रही हैं?" उन्होंने पूछा।

"हां आप ही से, आप ज़रा इधर आइये," मेरियन ने जवाब दिया और अपनी बड़ी-बड़ी नीली आंखें उन पर टिकाये रखीं, हर्स्ट का स्टाफ पीछे सरक गया और जल्द ही कमरे में एक कड़ा सन्नाटा छा गया।

हर्स्ट स्पिंक्स की तरह बैठे रहे और उनकी आंखें सिकुड़ कर छोटी हो गयीं। उनकी त्यौरियां चढ़ गयीं, उनके होंठ पतली रेखा में बदल गये और वे अपने सिहांसन सरीखी कुर्सी के हत्थे पर नर्वस हो कर उंगलियां थपकाने लगे। वे तय नहीं कर पा रहे थे कि गुस्से के मारे फट पड़ें या नहीं। मुझे लगा कि अपना हैट तलाश लिया जाये। लेकिन अचानक ही हर्स्ट खड़े हुए,"मेरा ख्याल है, अब मुझे जाना चाहिये," उन्होंने मेरियन की तरफ किसी गावदी की तरह लंगड़ा कर जाते कहा,"और हमारी मोहतरमा चाहती क्या हैं?"

"अपना धंधा शहर जा के करो।" मेरियन ने हिकारत से कहा,"मेरे घर में नहीं, मेरे मेहमान ड्रिंक के लिए इंतज़ार कर रहे हैं, इसलिए जल्दी करो और उनके लिए ड्रिंक्स ले कर आओ।"

"ठीक है ठीक है," उन्होंने कहा और जोकर की तरह खिसियाते हुए रसोई की तरफ लपके और सबने मुस्कुराते हुए राहत की सांस ली।

एक बार मैं एक ज़रूरी काम से लॉस एंजेल्स से न्यू यार्क तक की ट्रेन की यात्रा कर रहा था। मुझे तभी हर्स्ट से तार मिला जिसमें उन्होंने मुझे उनके साथ मैक्सिको की यात्रा पर चलने का न्यौता दिया था। मैंने वापसी तार भेजा कि मैं नहीं आ सकूंगा क्योंकि मुझे न्यू यार्क में ज़रूरी काम निपटाना है। अलबत्ता, कन्सास सिटी में मुझे हर्स्ट के दो एजेंट मिले। "हम आपको ट्रेन से उतार कर लेने आये हैं," उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा और बताया कि मिस्टर हर्स्ट न्यू यार्क में अपने वकीलों के जरिये मेरा ज़रूरी काम करवा देंगे। लेकिन मैं उनके साथ नहीं जा सका।

मैं किसी भी ऐसे व्यक्ति को नहीं जानता तो अपनी दौलत को इस तरह बेरहम तरीके से लुटाता हो जिस तरह से हर्स्ट लुटाते थे। रॉकफैलर दौलत का नैतिक बोझ महसूस करते थे, पीयरपाँट मोर्गन ने दौलत की ताकत को दिल से लगा लिया था लेकिन हर्स्ट लाखों-करोड़ों डॉलर निर्मम हो कर खर्च कर डालते थे मानो ये साप्ताहिक जेबखर्ची हो।

हर्स्ट ने मेरियन को सांता मोनिका में जो बीच हाउस दिया था, वह सांकेतिक रूप से रेत पर बनाया गया महल था। इसे इटली से आये कारीगरों ने बनाया था। इसमें जॉर्जियन शैली के सत्तर कमरे थे। ये तीन सौ फुट चौड़ा और तीन मंज़िला था, इसमें सोने का पानी चढ़ी पत्तियों वाला बॉलरूम और डाइनिंग रूम थे। वहां पर रेनॉल्ड्स, लॉरेंस, और दूसरे कलाकारों की पेंटिंग्स सब कहीं टंगी थीं। कहीं असली और कहीं नकली। वहां पर बनायी गयी ओक के पैनलों वाली विशालकाय लाइब्रेरी में जब एक बटन दबाया जाता था तो फर्श का एक हिस्सा ऊपर उठ जाता था और वह सिनेमा के परदे में बदल जाता था।

मेरियन के डाइनिंग रूम में पचास आदमी आराम से बैठ सकते थे। भव्य तरीके से सजे कई मेहमान कक्ष थे जहां पर आराम से बीस मेहमान टिक सकते थे। इटालियन संगमरमर का एक स्वीमिंग पूल था, उसके ऊपर से बीचों-बीच वेनेशियन संगमरमर का पुल बना हुआ था। ये समुद्र की तरफ एक घिरे हुए बगीचे में बना हुआ था। स्वीमिंग पूल से ही सटी हुई एक और जगह थी जहां पर बार रूम और छोटा-सा कैबरे डांस फ्लोर थे।

सांता मोनिका के प्राधिकारी चाहते थे कि वे वहां पर नौसेना के छोटे वाले क्राफ्ट के लिए और मौज मजा वाली किश्तियों के लिए एक छोटा-सा बंदरगाह बनायें। इस परियोजना को लॉस एंजेल्स टाइम्स का समर्थन मिला हुआ था। चूंकि मेरे पास भी एक छोटा सा क्रूजर था, मैंने सोचा कि ये बढ़िया रहेगा और इसके बारे में एक दिन नाश्ते के समय मैंने हर्स्ट से बात की। "इससे पूरे पास-पड़ोस पर खराब असर पड़ेगा।" उन्होंने हिकारत से कहा,"नाविक लोग आ-आ कर खिड़कियों से झांकेंगे मानो ये कोई रंडीखाना है।"

इसके बाद इस विषय पर कोई बात नहीं हुई।

हर्स्ट आश्चर्यजनक रूप से सहज रहते थे। जब वे मूड में होते तो मनभावन ठुमके लगाते हुए अपना प्रिय चार्ल्सटन डांस करते, इस बात की परवाह किये बिना कि कोई कुछ भी कहे। वे कभी भी कोई मुखौटा नहीं ओढ़े रखते थे और सिर्फ इसी बात से कोई काम करते थे कि उसे करना उन्हें अच्छा लगता है। उन्होंने मुझ पर ये हमेशा यही छवि छोड़ी कि वे सुस्त जान हैं। शायद वे थे भी, लेकिन उन्होंने कभी किसी और रूप में होने की कोशिश ही नहीं की। कई लोग सोचते थे कि रोज़ाना जो संपादकीय उनके हस्ताक्षरों के साथ जाते हैं, वे आर्थर ब्रिसबेन के लिखे होते हैं लेकिन ब्रिसबेन ने मुझे खुद ही बताया था कि हर्स्ट देश के सबसे होशियार संपादकीय लेखक थे।

कई बार वे आश्चर्यजनक रूप से बच्चों जैसा बरताव करने लगते और उनकी भावनाओं को आसानी से चोट पहुंचायी जा सकती थी। मुझे एक शाम की बात याद है, हम चेरेड्स का खेल खेल रहे थे। हम चुन रहे थे कि कौन किस तरफ रहेगा। हर्स्ट ने शिकायत की कि उन्हें बाहर ही छोड़ दिया गया है।

"तो ठीक है," जैक गिल्बर्ट ने ठिठोली करते हुए कहा,"हम दोनों मिल कर अपना खुद का चेरेड खेलेंगे और गोली और बक्से का अभिनय करेंगे। मैं बक्सा बनूंगा और आप गोली बन जाना।"

लेकिन डब्ल्यू आर ने इसका भी उल्टा ही मतलब निकाला और उनकी आवाज़ कापंने लगी,"मैं आपका सड़ा-गला चेरेड नहीं खेलना चाहता।" कहा उन्होंने और ये कहते हुए कमरे से बाहर चले गये और जाते-जाते ज़ोर से दरवाजा बंद कर गये।

सैन सिमॉन में हर्स्ट का चार लाख एकड़ का रैंच प्रशांत महासागर के तट के किनारे-किनारे तीस मील तक फैला हुआ था। रहने के जो क्वार्टर वहां पर बनाये गये थे वे किसी गढ़ की तरह समुद्र तल से पांच सौ फिट ऊपर और समुद्र तट से चार मील दूर एक पठार पर बनाये गये थे। मुख्य महल के लिए यूरोप से कई लदानों में कई किले जहाज से लाये गये थे, उन्हें मिला कर बनाया गया। उसका सामने का हिस्सा फ्रांस के सबसे बड़े रीम्स कैथेड्रल और विशाल स्विस लकड़ी के बंगले का मिला-जुला रूप लगता था। इसके चारों ओर प्रहरियों की तरह पांच इतालवी विला थीं जो कि पठार के कोने में बनी हुई थीं। प्रत्येक में छ: मेहमान ठहर सकते थे। इन्हें इतालवी शैली में सजाया गया था और इनकी छतें अति अलंकृत थीं और उनमें आपकी तरफ मुस्कुराते हुए फरिश्ते और देवदूत चित्रित किये गये थे। मुख्य बंगले में तीस और मेहमानों को टिकाने की जगह थी। स्वागत कक्ष नब्बे फुट लम्बा और पचास फुट चौड़ा था, उसमें सोने की चित्र यवनिका झूल रही थी, कुछ असली और कुछ नकली। इस राजसी परिवेश में चौसर जैसी मेजें थीं और कमरे के सभी कोनों में पिनबाल गेम्स थे डाइनिंग रूम वेस्टमिन्स्टर के गिरजे के बीच वाले भाग की तर्ज पर बनाया गया था और उसमें आराम से अस्सी लोग बैठ सकते थे। घर में साठ नौकर-चाकर थे।

महल से सुने जाने वाली दूरी पर एक चिड़िया घर था। वहां पर शेर, चीते, भालू, ओरांग उटांग और दूसरे लंगूर, पक्षी, और सर्प आदि थे। लॉज गेट से महल तक पांच मील लम्बी ड्राइव थी और रास्ते में दोनों तरफ नोटिस नज़र आते, "पशुओं को भी रास्ते पर चलने का अधिकार है।" कई बार आपको अपनी कार में वहां से जाते हुए रुक जाना पड़ता ताकि सड़क पर बैठे आस्ट्रिचों के झुंड तय कर सकें कि सड़क से हटना है या नहीं। भेड़ें, हिरण, बारहसिंघे और भैंसे झुंडों में इस्टेट में विचरते रहते और आपकी अपनी गति कम करनी पड़ती।

रेलवे स्टेशन पर मेहमानों को लिवाने के लिए कारें खड़ी रहतीं। और अगर आप हवाई जहाज से आ रहे हों तो आपके जहाज की लैंडिंग के लिए निजी फील्ड थी। यदि आप दो खानों के वक्त के बीच किसी वक्त वहां पहुंचते तो आपको बताया जाता कि आपके ठहरने का इंतज़ाम फलां जगह पर है और आपको हिदायत दी जाती कि डिनर का समय आठ बजे है और कॉकटेल मुख्य हॉल में साढ़े सात बजे सर्व किये जायेंगे।

मनोरंजन के लिए वहां पर थे तैराकी, घुड़सवारी, टैनिस, और हर तरक के खेलकूद। या आप चिड़ियाघर भी देखने जा सकते थे। हर्स्ट ने एक कड़ा नियम बना रखा था कि किसी को भी शाम छ: बजे से पहले ड्रिंक सर्व न किये जायें। लेकिन मेरियन अपने दोस्तों को अपने क्वार्टर में बुला लेतीं और वहां पर बिना भेदभाव के कॉकटेल सर्व किये जाते।

डिनर छप्पन भोग वाले होते। मीनू पढ़ कर लगता कि आप पहले चार्ल्स की दावत का मीनू पढ़ रहे हैं। वहां पर मौसम के अनुसार लजीज पकवान होते। भेड़, जंगली बत्तख, मुर्गाबी और हिरण का मांस। इस सब विलासिता के बीच हमें कागज के नैपकिन दिये जाते। और कपड़े वाले नैपकिन मेहमानों को तभी नसीब होते जब मिसेज हर्स्ट वहां पर मौजूद होतीं।

मिसेज हर्स्ट सैन सिमॉन में साल में एक बार आतीं और उनके आने से कोई भी हंगामा न होता। मैरियन और मिसेज हर्स्ट के बीच सह-अस्तित्व के लिए आपसी सहमति थी। जब मिसेज हर्स्ट के आने का समय निकट आने को होता, मैरियन और हम सब लोगों का जमावड़ा वहां से चुपचाप कूच कर जाता या फिर सांता मेरियन के मोनिका वाले बीच हाउस में जा कर डेरा डाल देते। मैं मिलिसेंट हर्स्ट को 1916 से जानता था और हम दोनों बहुत ही अच्छे दोस्त थे। इस हिसाब से मुझे दोनों ही घरों में आने की छूट थी। मिसेज हर्स्ट जब अपनी सैन फ्रांसिस्को की सोसाइटी की सखियों के साथ रैंच पर मौज कर रही होतीं तो वे मुझसे वहां पर वीक एंंड मनाने आने के लिए कहतीं और मैं वहां पर इस तरह चला जाता मानो मैं वहां पर पहली ही बार जा रहा होऊं। लेकिन मिलिसेंट को कोई भ्रम नहीं थे। हालांकि उन्हें इस बात का हल्का-सा अहसास होता कि सब लोग हाल में वहां से एक साथ निकले हैं, उसकी परवाह न करते हुए वे इसके बारे में हास्य बोध के साथ बतातीं।

"अगर मैरियन न होतीं तो उनकी जगह कोई और होता," उन्होंने कहा।

वे अक्सर मुझे विश्वास में ले कर मेरियन और हर्स्ट के संबंधों के बारे में बात करतीं। लेकिन इस बातचीत में कभी भी कड़ुवाहट न होती,"वे अभी भी ऐसा ही बरताव करते हैं मानो हम दोनों के बीच कभी कुछ हुआ ही न हो और मानो मेरियन का अस्तित्व ही न हो।" कहा उन्होंने,"जब मैं यहां पहुंचती हूं तो वे हमेशा बहुत प्यार से और स्नेह से पेश आते हैं लेकिन कभी भी मेरे पास कुछ घंटों से ज्यादा नहीं रहते। और हमेशा इसका एक ही रूटीन होता है। डिनर के बीच ही बटलर उन्हें एक पर्ची थमा जायेगा और वे माफी मांगते हुए मेज से उठ कर चल देंगे। जब वे वापिस आयेंगे तो खिसियाते हुए कहेंगे कि किसी ज़रूरी मामले की वजह से तुंत उन्हें लॉस एजेंल्स पहुंचना है और हम सब यही दर्शाते हैं कि हम उन पर विश्वास कर रहे हैं। और बेशक हम सब जानते हैं कि वे लौट कर मेरियन के पास जा रहे हैं।"

एक शाम डिनर के बाद मैं मैदान में चहल कदमी के लिए मिलिसेंट के साथ था। शेट्यू चांदनी में नहाया हुआ था और सात पहाड़ियों की जंगली सेटिंग में डरावना और भुतैला लग रहा था। बेहद साफ आकाश में तारे टिमटिमा रहे थे। एक पल के लिए खड़े हो कर हम इस अद्भुत दृश्य को निहारते रहे। चिड़ियाघर की तरफ से बीच-बीच में किसी शेर के चिंघाड़ने की आवाज़ आ जाती और किसी ओरांग उटांग के लगातार चीखने की आवाज़ें आतीं। ये आवाज़ें गूंजतीं और पहाड़ियों से टकरा कर लौट आतीं। ये सब अद्भुत और डरावना था। हर शाम ओरांग उटांग सूर्यास्त के वक्त शुरू करता और भयानक रूप से चिल्लाता रहता और ये चिल्लाना रात भर चलता रहता।

"ये कम्बख्त जानवर ज़रूर पागल होगा,' मैंने कहा।

"ये पूरी की पूरी जगह ही पागल बना देने वाली है, देखो तो जरा," महल की तरफ देखते हुए उन्होंने कहा,"पागल कलाकार ओटो का सृजन, और वह तब तक इस तरह की इमारतें बनाता जायेगा और उनमें जोड़ता जायेगा जब तक वह मर नहीं जाता। तब इनका क्या इस्तेमाल होगा। किसी की भी इतनी हैसियत नहीं है कि इनका रख रखाव ही कर सके। होटल के रूप में ये बेकार है। और हर्स्ट अगर इसे सरकार को सौंप देता है तो मुझे शक है कि वे इसका कोई इस्तेमाल कर भी पायेंगे या नहें। विश्वविद्यालय के रूप में भी नहीं।"

मिलिसेंट हमेशा हर्स्ट के बारे में मातृत्व के तरीके से बात करती थीं। इससे मुझे लगता था कि वे अभी भी उनसे भावनात्मक रूप से जुड़ी हुई हैं। वे दयालु, समझ-बूझ रखने वाली महिला थीं लेकिन बाद के बरसों में जब मैं राजनैतिक षडयंत्रों का शिकार हो गया था, उन्होंने मुझे त्याग दिया।

एक शाम जब मैं वीक एंड के लिए सैन सिमॉन में पहुंचा तो मेरियन मुझे मिलीं। वे नर्वस और उत्तेजित थीं। उनके मेहमानों में से एक पर उस वक्त ब्लेड से हमला किया गया था जब वह मैदान पार कर रहा था।

मेरियन जिस समय उत्तेजित होती थीं, हकलाती थीं, उससे उनका सौन्दर्य और भी निखर उठता था और उन्हें मुसीबत में औरत वाले गुणों से भर देता था। "हम अभी .....भी न नहीं जानते कि कि किसने कि ... किया है ये," वे फुसफुसायीं,"लेकिन डब्ल्यू आर के कई जा.. .. सूस मैदान की तलाशी ले .. रहे हैं और हम कोशिश कर रहे हैं कि ये खबर दूसरे मेहमानों तक न पहुंचे। कुछ लोगों का ख्याल है कि ये किसी फिलिपीनो की कारस्तानी है। इसलिए हर्स्ट ने रैंच से सभी फिलिपीनो लोगों को तब तक के लिए हटा दिया है जब तक जांच पूरी न हो जाये।"

"वो आदमी कौन है जिस पर हमला हुआ है?" पूछा मैंने।

"आप उसे रात को खाने की मेज पर देखेंगे," कहा उसने।

डिनर के वक्त मैं उस नौजवान के सामने बैठा जिसका चेहरा पट्टियों से ढका हुआ था। सिर्फ उसकी चमकती हुई आंखें और सफेद दांत ही दिखायी दे रहे थे जिन्हें वह बीच बीच में मुस्करा कर झलका रहा था।

मेरियन ने मेज़ के नीचे से मुझे इशारा किया,"यही है वो," वे फुसफुसायीं।

ऐसा कत्तई नहीं लगा कि उस पर हमला हुआ होगा, उसकी अच्छी खासी खुराक थी। उससे जो भी पूछा जा रहा था, वह बस, कंधे उचका देता या खिसिया कर हँस देता।

डिनर के बाद मेरियन ने मुझे वह जगह दिखायी, जहां पर हमला हुआ था, ये जगह मूर्ति के पीछे थी। बताया उन्होंने, "विजेता की पंख वाली संगमरमर की मूर्ति के पीछे। वहां पर खून के निशान हैं।"

"वह मूर्ति के पीछे क्या कर रहा था?"

"हमलावर से ब .. .. बचने के लिए।" उसने जवाब दिया।

अचानक ही अंधेरे में से हमारा मेहमान अवतरित हुआ और इस वक्त भी उसका चेहरा खून से लथपथ था। वह हमारे पास से लड़खड़ाते हुए गुज़रा। मेरियन चीखीं और तीन फुट उछल गयीं। पल भर में न जाने कहां से बीस आदमी वहां पर जुट आये।

"मुझ पर फिर से हमला हुआ है।" वह मिमियाया। उसे दो जासूसों ने अपनी बाहों पर थामा हुआ था और उसे उसके कमरे में वापिस ले जाया गया। वहां पर उससे पूछताछ हुई। मेरियन गायब हो गयीं। लेकिन एक घंटे बाद मैंने उन्हें मुख्य हॉल में देखा।

"क्या हुआ?" पूछा मैंने।

वे शंकित नज़र आ रही थीं,"उनका कहना है कि उस आदमी ने ये खुद ही किया है।" वह खड़ूस है और सिर्फ अपनी ओर ध्यान दिलाना चाहता है।"

बिना किसी और पूछताछ के उस सनकी का बोरिया बिस्तर बांध के उसी रात पहाड़ी से भेज दिया गया और बेचारे फिलिपीनो सवेरे अपने काम पर लौट आये।

सर थॉमस लिप्टन सैन सिमॉन पर तथा मेरियन के बीच हाउस पर मेहमान थे। वे खुशमिजाज, बहुत बोलने वाले बूढ़े स्कॉटमैन थे और वे बहुत अच्छे देहाती उच्चारण में बात करते थे। वे रुक रुक कर बोलते थे और यादों में खो जाते थे।

उन्होंने कहा,"चार्ली, आप अमेरिका आये और आपने अपनी किस्मत का सितारा बुलंद किया। मैंने भी यही किया। मैं पहली बार यहां आया तो मवेशियों वाली नाव में आया था। और तब मैंने अपने आप से कहा, "अगली बार, मैं अपनी याच पर आऊंगा और मैं आया।" उन्होंने मुझसे शिकायत की कि उन्हें उनके चाय के कारोबार में लाखों डॉलर का चूना लगाया जा रहा है।"

एलेक्जेंडर मूर, स्पेन में राजदूत, सर थॉमस लिप्टन और मैं अक्सर लॉस एंजेल्स में एक साथ खाना खाते। और सर थॉमस और एलेक्स वे बारी बारी से पुरानी यादों में खो जाते और सिगरेट के टोटों की तरह शाही नाम उनके मुंह से निकलते रहते। दोनों ही मुझ पर ये प्रभाव छोड़ते कि राजसी जीवन में और कुछ नहीं बस सूक्तियां ही होती हैं।

इस अरसे में मैं हर्स्ट और मेरियन से बहुत बार मिला क्योंकि मैं उस शानो शौकत की ज़िंदगी को पसंद करता था जो वे जीते थे और चूंकि मेरे पास हमेशा वीक एंड मेरियन के बीच हाउस में मनाने का न्यौता होता, मैं अक्सर इसका खास तौर पर फायदा उठाता क्योंकि तब डगलस और मैरी यूरोप गये होते। एक सुबह कई दूसरे लोगों के साथ ब्रेकफास्ट के समय मेरियन ने अपनी पटकथा के बारे में मेरी राय जाननी चाही। लेकिन मैंने जो कुछ कहा, वह डब्ल्यू आर को पसंद नहीं आया। कहानी की थीम औरताना थी और मैंने इस बात का उल्लेख किया कि औरतें पुरुषों का पीछा करती हैं और पुरुषों को इस मामले में करने धरने को कुछ नहीं होता।

डब्ल्यू आर ने इसका उल्टा सोचा,"ओह नहीं," कहा उन्होंने,"आदमी ही हमेशा चुनता है।"

"हम सोचते हैं कि हम चुनते हैं," मैंने जवाब दिया,"लेकिन होता है कि कोई नन्हीं परी अपनी छोटी उंगली से आपकी तरफ इशारा करती है और कहती है ये मेरा है, और आपको ले लिया जाता है।"

"आप बिलकुल ही गलत कह रहे हैं।" डब्ल्यू आर ने पूरे विश्वास के साथ कहा।

"मुसीबत ये है," मैं कहता रहा,"उनकी तकनीक इतनी शानदार तरीके से छुपी होती है कि हमें यही विश्वास दिलाया जाता है कि चयन हम ही कर रहे हैं।"

डब्ल्यू आर ने अचानक मेज़ पर ज़ोर का घूंसा मारा कि मेज पर ब्रेकफास्ट की चीजें उलट पुलट गयीं,"जब मैं कहता हूं कि कोई चीज़ सफेद है तो आप कहते हैं कि काली है।" वे चिल्लाये।

मुझे लगा कि मैं थोड़ा पीला पड़ गया। उस वक्त बटलर मेरी कॉफी डाल रहा था। मैंने सिर उठाया और कहा,"क्या आप किसी को मेरा सामान पैक करने के लिए कहेंगे और मेरे लिए एक टैक्सी बुलवा देंगे।" तब एक शब्द भी बोले बिना मैं उठा और बालरूम में चला गया और वहां पर गुस्से से भरा हुआ चुपचाप चहल कदमी करने लगा।

एक पल बाद मेरियन आयीं,"क्या हो गया चार्ली?"

मेरी आवाज़ कांपी,"मुझ पर इस तरह से कोई आदमी चिल्ला नहीं सकता। वह अपने आप को समझता क्या है? नेपोलियन? नीरो?"

मेरी बात का जवाब दिये बिना वे मुड़ीं और तेज़ी से कमरे से चली गयीं। एक पल के बाद डब्ल्यू आर आये और ऐसे जतलाने लगे मानो कुछ हुआ ही न हो,"क्या बात है चार्ली?"

"मैं इस बात का आदी नहीं हूं कि कोई मुझ पर चिल्लाये, खास तौर पर तब जब मैं घर में मेहमान हूं। इसलिए मैं ... मैं जा रहा हूं।" मेरी आवाज गले में ही फंस कर रह गयी और मैं वाक्य ही पूरा नहीं कर पाया।

डब्ल्यू आर ने एक पल के लिए सोचा और वे भी वहीं पर चहल कदमी करने लगे।

"आओ हम इस बारे में बात कर लें।" उन्होंने कहा, उनकी आवाज़ भी भर्रा गयी थी।

मैं उनके पीछे पीछे हॉल में और वहां से आराम करने वाले कमरे में चला जहां पर एक एंटीक डबल कुर्सी रखी हुई थी। डब्ल्यू आर छ: फुट चार इंच के थे और बहुत बड़ी काया थी उनकी। वे बैठ गये और जितनी भी जगह बची थी उसमें मुझे भी बैठने का इशारा किया।

"बैठ जाओ चार्ली, और हम बातचीत से इसे सुलझा लेंगे।"

मैं उनके पास बैठ गया। लेकिन मैं सिकुड़ कर ही बैठ पाया। बिना एक शब्द भी बोले उन्होंने मेरी तरफ अपना हाथ बढ़ाया, हालांकि बैठे हुए मैं अपना हाथ हिला भी नहीं सकता था, मैंने हाथ मिला ही लिया।

तब उन्होंने सफाई देनी शुरू की, उनकी आवाज़ अभी भी कांप रही थी,"देखो चार्ली, मैं सचमुच नहीं चाहता कि मेरियन ये स्‍क्रिप्ट करे, और वह तुम्हारी राय की कद्र करती है। और जब तुमने उसे अनुमोदित कर दिया तो मेरा ख्याल है मैं इसी वजह से तुम्हारे साथ ऊंचा नीचा बोल गया।"

मैं तत्काल ही पिघल गया और मैं ही अपने आपको दोषी बताने लगा कि ये सब मेरी ही गलती थी। अंतिम सद्भावना के रूप में हम दोनों ने एक बार फिर हाथ मिलाये और उठने की कोशिश की लेकिन हम दोनों ही चिंपेंडेल में फंस गये थे और कुर्सी के क्रैक होने की आवाज़ें आने लगीं कई बार कोशिश करने के बाद हम दोनों अपने आप को कुर्सी से मुक्त करा पाये और कुर्सी को भी कुछ नहीं हुआ।

ऐसा लगता है कि मेरियन मुझसे मिल कर गयीं तो सीधे हर्स्ट के पास गयी होगीं और उन्हें मेरे प्रति इतना बदतमीज होने के लिए उन्हें फटकारा होगा और कहा होगा कि जाओ और चार्ली से माफी मांगो। मेरियन इस बात को जानती थीं कि किस वक्त अपनी बात मनवानी है और किस वक्त चुप रहना है। वह अक्सर ऐसा ही करती थीं। हर्स्ट के खराब मूड में, मेरियन ने बताया, तूफान ज़ोरदार शोर शराबे के साथ इसी तरह आता है।

मेरियन आकर्षक औरत थीं। और जब हर्स्ट को अपने कारोबार के सिलसिले में न्यू यार्क जाना पड़ता तो वे अपने सारे दोस्तों को बेहरली हिल्स वाले अपने घर (ये बीच हाउस के बनने से पहले की बात है) पर बुला लेतीं और वहां पर हम पार्टियां करते, और आधी रात तक चेरेड्स खेलते रहते। तब रुडोल्फ वेलेन्टिनो अपने छोटे से घर पर पार्टी देते और मैं भी अपने घर पर यही कुछ करता। कई बार हम पब्लिक बस किराये पर ले लेते और उसमें खाने पीने का सामान एक तरह से ठूंस ठूंस कर भर देते और हम दस या बीस लोग मालीबू बीच पर चले जाते जहां पर हम कैम्प फायर जलाते और आधी रात की पिकनिकें मनाते और ग्रनिऑन मछलियां पकड़ते।

लॉयेला पारसंस, हर्स्ट की कॉलम लेखिका अनिवार्य रूप से आतीं और उनके साथ होते हैरी क्रोकर जो बाद में जा कर मेरे सहायक निर्देशकों में से एक बने। इस तरह के अभियानों के बाद हम तीन चार बजे तक वापिस घर न जाते। मेरियन लॉयेला से कहतीं, "अगर हर्स्ट को इस सबके बारे में पता चल जाये तो हम दोनों में से एक की नौकरी जायेगी और वो कम से कम मैं मैं नहीं होऊंगी।"

मेरियन के घर पर इस तरह की एक मौज मज़ा पार्टी के दौरान हर्स्ट ने न्यू यार्क से फोन किया, जब मेरियन फोन सुन कर वापिस आयीं तो वे गुस्से से लाल पीली हो रही थीं,"क्या आप कल्पना कर सकते हैं?" उन्होंने हिकारत से कहा,"हर्स्ट ने मुझ पर जासूस छोड़ रखे हैं।"

फोन पर ही हर्स्ट ने अपने जासूस की रिपोर्ट पढ़ी कि जब से वे बाहर गये थे, यहां पर क्या कुछ चल रहा था।

कि वे फलां के घर से रात चार बजे वापिस आयीं और ढिमका के घर से सुबह पांच बजे वापिस आयीं और इस तरह से। मेरियन ने मुझे बाद में बताया कि हर्स्ट तुरंत ही लॉस एंजेल्स लौट रहे हैं ताकि उनके साथ सारे मामले निपटा लें और कि दोनों अलग हो जायेंगे। बेशक मेरियन नाराज़ थीं, क्योंकि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया था और सिर्फ दोस्तों के साथ मौज मजा करती रही थीं। देखा जाये तो जासूस की रिपोर्ट सच थी लेकिन इसे गलत छवि देने के लिए तोड़ मरोड़ दिया गया था। कन्सास सिटी से हर्स्ट ने तार भेजा,"मैंने अपना इरादा बदल लिया है, और मैं कैलिफोर्निया नहीं लौटूंगा क्योंकि मैं उन जगहों पर अपना चेहरा नहीं दिखा सकता जहां पर मुझे इतना अधिक आनंद मिला है, इसलिए मैं न्यू यार्क लौट रहा हूं।"

लेकिन जल्द ही उन्होंने एक और तार भेजा कि वे लॉस एंजेल्स आ रहे हैं।

जब हर्स्ट लौटे तो हम सब के लिए ये बहुत ही तनावपूर्ण पल थे। अलबत्ता, मेरियन से उनकी जो बातचीत हुई उसका बहुत अच्छा परिणाम रहा। इसकी परिणति हुई बेवरली हिल्स पर हर्स्ट के सम्मान में बहुत ही भव्य पार्टी दी गयी। मेरियन ने अपने किराये के घर में एक अस्थायी डाइनिंग रूम बनवाया जिसमें एक सौ साठ मेहमान आ सकते थे। इसे दो ही दिन में पूरा कर लिया गया। डांस फ्लोर की इमारत सहित इसे सजाया गया। बिजलियों से इसे सजाया गया था, मात्र दो दिन में। मेरियन को केवल जादुई चिराग रगड़ना था और काम हो जाता। उस शाम वह अपनी 75000 डॉलर की पन्ने की अंगूठी पहन कर आयी थीं। ये हर्स्ट की ओर से भेंट थी और संयोग से किसी को भी अपनी नौकरी से हाथ नहीं धोना पड़ा।

सैन सेमियन और मेरियन के बीच हाउस से बदलाव के तौर पर हम अक्सर अपने वीक एंड हर्स्ट के याच पर बिताते और कैटैलिना या सैन डियेगो के दक्षिण की तरफ समन्दर की सैर करते। इन्हीं क्रूस यात्राओं में से किसी एक के दौरान ऐसा हुआ कि थॉमस एच इन्स जिन्होंने हर्स्ट की कॉस्मोपोलिटन फिल्म प्रोडक्शन ली थी, को नाव से उतार कर सैन डिऐगो ले जाना पड़ा। मैं उस ट्रिप पर मौजूद नहीं था लेकिन एलिनॉर ग्लिन जो उस वक्त मौजूद थी ने बाद में मुझे बताया था कि इन्स खुशमिजाज इन्सान थे और मौज कर रहे थे लेकिन लंच के दौरान उन्हें अचानक ऐसा दर्द उठा मानो लकवा मार गया हो और उन्हें मेज पर से उठ जाना पड़ा। सबने यही सोचा कि हो सकता है ये हाजमे वाली गड़बड़ होगी लेकिन वे इतने बीमार हो गये कि यही ठीक समझा गया कि उन्हें किनारे पर उतार कर अस्पताल भिजवा दिया जाये। अस्पताल में ही पता चला कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा है। फिर उन्हें बेवरली हिल स्थित उनके घर पर भिजवा दिया गया। वहां पर तीन हफ्ते बाद उन्हें एक और दौरा पड़ा और वे चल बसे।

इस किस्म की गंदी अफवाहें उड़ने लगीं कि इन्स को गोली मारी गयी थी और इसमें हर्स्ट शामिल थे। ये अफवाहें पूरी तरह से झूठ थीं। मैं इस बात को जानता हूं क्योंकि मैं, हस्ट्र, मेरियन एक साथ उनकी मृत्यु से दो हफ्ते पहले मिलने के लिए उनके घर पर गये थे और वे हम तीनों को देख कर बहुत खुश हुए थे और विश्वास कर रहे थे कि वे जल्द ही ठीक हो जायेंगे।

इन्स की मौत से हर्स्ट की कॉस्मोपालिटन प्रोडक्शन की योजनाएं खटाई में पड़ गयीं इसलिए उन्हें वार्नर ब्रदर्स ने अपने हाथ में ले लिया। लेकिन दो बरस बाद हर्स्ट प्रोडक्शन एमजीएम के पास चली गयी जहां पर मेरियन के लिए एक बहुत ही विशाल बंगला ड्रेसिंग रूम बनाया गया था (मैंने इसे ट्रियानन नाम दिया)।

यहां पर हर्स्ट अपने अखबारों के कारोबार के ज्यादातर मसले निपटाते। कई बार मैंने मेरियन के स्वागत कक्ष में उन्हें पूरे फर्श पर बीस या उससे भी अधिक अखबार फैलाये हुए राजसी कुर्सी पर बैठे देखा। अपनी कुर्सी पर बैठे बैठे वे अलग अलग अखबारों की हैड लाइनों पर निगाह डालते, और ऊंची आवाज़ में बोलना शुरू कर देते,"ये बेहद सिड़ी सेटअप है," फिर दूसरा अखबार उठाते, "और फलां ये स्टोरी क्यों दे रहा है?" तब वे एक पत्रिका उठाते और दोनों हाथों में वजन करते, फिर बोलते,"इस महीने क्या मामला है? ये इतनी हल्की क्यों है? विज्ञापन विभाग क्या कर रहा है। रे लाँग को तार करके तुरंत यहां आने को कहो।" इस दृश्य के बीच मेरियन अपनी शानदार तड़क भड़क में अवतरित होतीं, अभी अभी फिल्म के सेट से आते हुए और अपनी महारानी वाली चाल से जानबूझ कर अखबारों के ऊपर से चलती हुई आतीं, और कहतीं, "हटाओ ये सब कचरा, मेरे सारे ड्राइंगरूम को घेर रखा है।"

हर्स्ट बेहद नौसिखिये बन जाते थे। मेरियन की किसी फिल्म के प्रीमियर पर जाते समय वे मुझे बुलवाते कि मैं उनके साथ ही चलूं और प्रवेश द्वार पर पहुंचने से पहले ही वे कार में से उतर जाते ताकि लोग उन्हें मेरियन के साथ आता हुआ न देख लें। इसके बावजूद जब हर्स्ट के एक्जामिनर और लॉस एंजेल्स का टाइम्स एक राजनैतिक झगड़े में उलझे हुए थे, हर्स्ट बुरी तरह से हमला कर रहे थे और टाइम्स पिछड़ रहा था, टाइम्स ने व्यक्तिगत हमले करने शुरू कर दिये और हर्स्ट पर आरोप लगाया कि वे दोहरा जीवन जी रहे हैं तथा सांता मोनिका बीच पर एक प्यार का घोंसला बनाये हुए हैं, अखबार ने मेरियन का नाम भी उछाल दिया। हर्स्ट ने अपने अखबार में इस हमले का कोई जवाब नहीं दिया। लेकिन एक दिन बाद (उसी दिन मेरियन की मां गुज़री थीं) मेरे पास आये और बोले, "चार्ली, क्या मिसेज डेविस की अंतिम यात्रा में तुम मेरे साथ अर्थी को आगे की तरफ से कंधा दोगे?" और मैंने बेशक उनकी बात मान ली थी।

1933 या उसके आस पास हर्स्ट ने मुझे अपने साथ यूरोप की यात्रा के लिए न्यौता दिया। उन्होंने कुनार्ड लाइंस नाम के जहाज की पूरी एक साइड ही अपनी पार्टी के लिए अपने नाम पर बुक करा ली थी। लेकिन मैंने मना कर दिया। क्योंकि इस का मतलब होता, दूसरे लोगों के साथ घिसटते रहो। जहां हर्स्ट ले जायें, वहीं जाओ, जहां हर्स्ट को जल्दी हो, वहीं लपकते हुए जाओ।

मुझे इस तरह का अनुभव एक बार पहले हो चुका था। मैं मैक्सिको की ट्रिप में उनके साथ था। उस वक्त मेरी दूसरी पत्नी गर्भवती थी। दस कारों का एक काफिला हर्स्ट और मेरियन की कार के पीछे पीछे उबड़ खाबड़ सड़कों पर चल रहा था। मैं इसकी वजह से सारे के सारे अमले को कोस रहा था। सड़कें इतनी खराब थीं कि हमें अपने मंज़िल की यात्रा बीच में ही छोड़ देनी पड़ी और रात भर के लिए एक मैक्सिकन फार्म हाउस में रुकना पड़ा। हम बीस लोगों के लिए वहां पर सिर्फ दो ही कमरे थे। मेहरबानी पूर्वक एक कमरा मेरी पत्नी, एलिनॉर और मुझे दे दिया गया था। कुछ लोग मेजों पर सोये, कुछ कुर्सियों पर, कुछ लोग मुर्गियों के दड़बों में सोये, और कुछ रसोई में।

उस छोटे से कमरे में नज़ारा बहुत ही शानदार था। मेरी पत्नी अकेले बिस्तर पर, मैं मुड़ी तुड़ी दो कुर्सियों पर, और एलिनॉर, इस तरह की पोशाक में मानो रिट्ज जा रही हों, अपना हैट पहने हुए, नकाब वाली जाली लगाये और दस्ताने पहने हुए एक टूटे फूटे दीवान पर लेटीं। वे अपने हाथ अपनी छाती पर यूं बांधे हुए थीं मानो कब्र में कोई आलसी काया हो। वे एक ही पोज़ में बिना किसी बाधा के सोती रहीं। मैं इस बात को जानता हूं क्योंकि मैंने रात भर एक बार भी पलक नहीं झपकायी थी। सुबह मैंने अपनी आंख की कोर से देखा कि वे जैसे सो रही थीं, वैसे ही उठीं, उनका बाल तक इधर से उधर नहीं हुआ था, उनकी गोरी चमड़ी और चमक लिये हुए, मानो वह रात भर प्लाज़ा होटल के टीरूम में टहलती रही हों।

यूरोप की ट्रिप पर हर्स्ट अपने साथ हैरी क्रोकर को ले गये। अब वह हर्स्ट का सामाजिक सचिव बन गया था। हैरी ने मुझसे पूछा कि क्या मैं हर्स्ट को सर फिलिप सासून के नाम परिचय का एक पत्र दूंगा। मैंने ये पत्र दिया।

फिलिप ने हर्स्ट को काफी समय दिया। यह बात जानने के बाद कि हर्स्ट कई बरस तक घोषित रूप से ब्रिटिश विरोधी रहे हैं, उन्होंने हर्स्ट की प्रिंस ऑफ वेल्स के साथ मुलाकात रखवायी।

सासून ने उन दोनों को पुस्तकालय के एक बंद कमरे में बातचीत के लिए छोड़ दिया। जहां फिलिप के कथनानुसार प्रिंस ने हर्स्ट से साफ साफ पूछ लिया कि वे इतने अधिक ब्रिटिश विरोधी क्यों हैं। वे वहां पर दो घंटे के लिए रहे, बताया सासून साहब ने, और उनका मानना था कि इस बातचीत के बहुत अच्छे परिणाम आये।

मैं कभी भी हर्स्ट की ब्रिटिश विरोधी भावना को समझ नहीं पाया क्योंकि उनकी इंगलैंड में बेशकीमती सम्पत्ति थी और उन्हें वहां से खूब लाभ मिलते थे। उनकी जर्मन के पक्ष की प्रवृतियां पहले विश्व युद्ध के समय से चली आ रही थीं, जिस आड़े वक्त में काउंट बर्नस्ट्राफ के साथ उनके साथ और मित्रता ने एक स्कैंडल का रूप ले लिया था। उस वक्त काउंट जर्मन राजदूत हुआ करते थे। इसलिए हर्स्ट की असीम शक्ति भी तब उस स्कैंडल का दबा नहीं पायी थी। तब भी उनके अमेरिकी विदेशी संवाददाता कार्ल वॉन वीगैंड दूसरे विश्व युद्ध के शुरू होने तक जर्मनी के पक्ष में लगातार लिखता रहा।

अपनी यूरोप ट्रिप के दौरान हर्स्ट जर्मनी गये और हिटलर से मिले। और उनके साथ बातचीत की। उस वक्त तक हिटलर के यातना शिविरों के बारे में कोई भी नहीं जानता था। इनके बारे में सबसे पहले खबर मेरे मित्र कोर्नेलियस वेंडरबिल्ट की रिपोर्टों से आयी जो किसी न किसी बहाने से एक यातना शिविर में घुस गया था और वहां पर नाजियों के अत्याचारों के बारे में लिखा। लेकिन इन अमावनीय अत्याचारों के बारे में उसके रिपोर्टें इतनी शानदार थीं कि उनके सच होने के बारे में किसी को विश्वास ही नहीं हुआ।

वेंडरबिल्ट ने मुझे पोस्ट कार्डों की एक सीरीज भेजी थी जिनमें हिटलर भाषण दे रहे थे। उसका चेहरा अश्लीलता की हद तक कॉमिक था, मेरी बहुत ही खराब नकल। उसकी घिनौनी मूंछें, बेतरतीब खड़े बाल, और हिकारत पैदा करने वाला पतला चेहरा। मैं हिटलर को गम्भीरता से नहीं ले पाया। हरेक पोस्टकार्ड में उसे अलग पोज में दिखाया गया था। एक में उसके हाथ पंजों की तरह थे, भीड़ को हांकते हुए, एक में एक हाथ ऊपर और दूसरा हाथ नीचे था, तीसरे में क्रिकेटर की भूमिका में जैसे गेंद फैंकने वाला हो। एक और पोस्टकार्ड में दोनों हाथ इस तरह से आगे की तरफ रखे हुए थे मानो काल्पनिक मुगदर उठाया जा रहा हो। सलामी लेते हुए एक हाथ पीछे की तरफ जा रहा था, हथेली ऊपर की तरफ मुझे लगा कि गंदी प्लेटें इस हाथ पर धर दी जायें। ये तो खड़ूस है मैंने सोचा, लेकिन जब आइंस्टीन और थॉमस मान को जर्मनी छोड़ने पर मज़बूर होना पड़ा तो हिटलर का ये चेहरा मज़ाकिया न रह कर पापी का हो गया था।

मैं आइंस्टीन से पहली बार 1926 में मिला था जब वे कैलिफोर्निया में व्याख्यान देने के लिए आये थे। मेरी एक थ्योरी है कि वैज्ञानिक और दार्शनिक प्रकाशमान रूमानी दुनिया में बसने वाले लोग होते हैं जो अपनी आवेश को दूसरी दिशाओं की तरफ मोड़ देते हैं। ये थ्योरी आइंस्टीन के व्यक्तित्व पर पूरी तरह से माफिक बैठती थी। वे सबसे अच्छे अर्थों में हँसोड़ और मित्रवत व्यक्तित्व के साथ एकदम आल्प पर्वत पर रहने वाले जर्मन लगते थे। हालांकि उनके तौर तरीके शांत और विनम्र थे, मैंने ये महसूस किया कि ये बातें बेहद संवेदनशील उत्तेजना के नीचे छुपी हुई थीं और इसी स्रोत से वे अपनी असाधारण बौद्धिक ऊर्जा ग्रहण करते हैं।

युनिवर्सल स्टूडियोज के कार्ल लाएमले ने फोन करके मुझे बताया कि आइंस्टीन महोदय मुझसे मिलना चाहेंगे। मैं रोमांच से भर गया। इस तरह से हम लंच के लिए युनिवर्सल स्टूडियो में मिले। प्रोफेसर, उनकी पत्नी, उनके सचिव हेलेन डुकास और उनके सहायक, प्रोफेसर वाल्टर मायेर। मिसेज आइंस्टीन अंग्रेजी बहुत अच्छी बोल लेती थीं, दरअसल प्रोफेसर से भी बेहतर। वे विराट ऊर्जा वाली चौड़े बदन की महिला थीं। वे इस महान व्यक्ति की पत्नी होने का सुख सहजता से भोग रही थीं, और इस तथ्य को छुपाने का उन्होंने कोई प्रयास नहीं किया। उनका उत्साह देखते ही बनता था।

लंच के बाद जिस वक्त मिस्टर लाएमेले स्टूडियो में चारों तरफ घुमा रहे थे तो मिसेज आंइस्टीन मुझे एक तरफ ले गयीं और फुसफुसा कर बोलीं,"आप प्रोफेसर को अपने घर पर आमंत्रित क्यों नहीं करते? मुझे पता है वे सिर्फ हम तीनें के बीच शांत बातचीत का खुब लुत्फ उठायेंगे।" जैसा कि मिसेज आइंस्टीन ने अनुरोध किया था, ये एक छोटी सी पार्टी होनी चाहिये, मैंने सिर्फ दो और दोस्तों को बुलवाया। डिनर के वक्त मिसेज आइंस्टीन ने मुझे उस सुबह का किस्सा बताया जब प्रोफेसर को सापेक्षता का सिद्धांत सूझा था।

"प्रोफेसर हमेशा की तरह अपने ड्रेसिंग गाउन में नीचे नाश्ते के लिए आये लेकिन शायद ही उन्होंने किसी चीज़ को छुआ हो। मुझे लगा कि कुछ न कुछ गड़बड़ है। इसलिए मैंने पूछा कि कौन सी बात आपको परेशान किये हुए है। 'डार्लिंग,' वे बोले,'मेरे दिमाग में एक शानदार विचार आया है।' अपनी कॉफी पी लेने के बाद वे पिआनो पर गये और बजाना शुरू कर दिया। बीच बीच में वे रुक जाते, कुछ देर तक कुछ नोट्स लेते और फिर से बजाने लगते। 'मेरे दिमाग में एक शानदार विचार आया है, अद्भुत विचार!'

मैंने कहा,'तो भगवान के नाम पर मुझे तो बताइये कि ये विचार है क्या, मुझे रहस्य में मत रखो!'

वे बोले,'बहुत मुश्किल है, मुझे अभी उस पर और काम करना है।'

मैडम ने मुझे बताया कि वे लगातार आधे घंटे तक पिआनो बजाते रहे और नोट्स लेते रहे। तब वे ऊपर अपनी स्टडी में चले गये, मुझसे कहा कि वे किसी भी किस्म का व्यवधान नहीं चाहते, वे ऊपर दो हफ्ते तक रहे और मैं उनका खाना ऊपर ही भेजती रही। बताया उन्होंने,'और कभी शाम के वक्त वे एक्सरसाइज करने के लिए थोड़ा सा टहल लेते और फिर से अपने काम पर वापिस चले जाते।

'आखिरकार,' मैडम ने बताया,'वे अपनी स्टडी से नीचे आये। वे बहुत ही पीले नज़र आ रहे थे।' 'ये रहा,' उन्होंने थकान भरी आवाज में कहा और मेरे सामने मेज़ पर दो कागज़ रख दिये। और ये था सापेक्षता का सिद्धांत।'"

डॉक्टर रेनॉल्ड्स को मैंने उस शाम आमंत्रित किया था क्योंकि वे भौतिकी के विद्वान थे। उन्होंने प्रोफेसर से डिनर के दौरान पूछा कि क्या उन्होंने डुने की एन एक्स्पेरिमेंट विद टाइम पढ़ी है।

प्रोफेसर ने सिर हिला दिया।

रेनाल्ड्स हवा बांधने लगे,"विस्तार, डाइमेन्शन के बारे में उनकी एक रोचक थ्योरी है। एक तरह की . . . यहां पर वे हिचकिचाये, एक तरह के विस्तार का विस्तार!"

प्रोफेसर तुरंत मेरी तरफ मुड़े और शरारत पूर्ण तरीके से फुसफुसाये,"विस्तार का विस्तार, ये क्या होता है?"

रेनॉल्ड्स तब विस्तार के रथ से उतर गये और फिर उन्होंने प्रोफेसर से पूछा कि क्या आप भूत प्रेतों में विश्वास करते हैं। प्रोफेसर आइंस्टीन ने माना कि हालांकि उन्होंने कभी भूत देखे तो नहीं है, फिर आगे कहा कि अगर बारह आदमी एक ही समय में एक ही घटना को देख लें तो वे भी उस पर विश्वास कर लेंगे। वे मुस्कुराये।

उस समय में मन की गुत्थियों को ले कर हॉलीवुड में अच्छा खासा हंगामा सा बरपा हुआ था। खास तौर पर फिल्मों के नायकों के घरों में तो तंत्र मंत्र का बहुत ज़ोर था। वहां पर आध्यामिक बैठकें होतीं, आकाश गमन और मानसिक करतबों के प्रदर्शन होते। मैं इन आयोजनों में नहीं जाया करता था लेकिन फैनी ब्राइस, विख्यात कॉमेडियन ने कसम खाते हुए बताया कि ऐसी ही एक बैठक में उसने मेज को ऊपर उठते हुए और कमरे में चारों तरफ तैरते हुए देखा। मैंने प्रोफेसर से पूछा कि क्या उन्होंने कभी ऐसी कोई घटना देखी है।

वे मुस्कुराये और सिर हिलाया। मैंने उनसे यह भी पूछा कि क्या उनका सापेक्षता सिद्धांत कहीं न्यूटन की कल्पनाओं से टकराता है।

"इसके विपरीत," प्रोफेसर बोले,"यह उसका विस्तार ही है।"

डिनर के दौरान मैंने मिसेज आइंस्टीन को बताया कि जब भी मुझे मौका मिलेगा, मैं यूरोप जाना चाहूंगा।

"तब तो आपको जरूर ही बर्लिन आना चाहिये और हमारे घर आना चाहिये।" वे बोलीं,"हमारे पास बहुत बड़ी जगह नहीं है। प्रोफेसर बहुत अमीर नहीं है, हालांकि उनके पास वैज्ञानिक कार्य के लिए रॉकफैलर फाउंडेशन के दस लाख डॉलर से भी ज्यादा तक पहुंच होती है लेकिन वे कभी उसे हाथ नहीं लगाते।"

बाद में मैं जब बर्लिन गया तो उनके साधारण छोटे से घर में गया। ये उस तरह का घर था जो आपको आम तौर पर न्यू यार्क के ब्रांक्स इलाके में दिखायी देता है। एक ही कमरे में बैठक और डाइनिंग रूम, उसमें पुराने फटे हुए कालीन बिछे थे। वहां का सबसे ज्यादा कीमती फर्नीचर था उनका पिआनो जिस पर उन्होंने चौथे विस्तार के ऐतिहासिक प्रारम्भिक नोट लिखे थे। मैं कई बार हैरान होता हूं कि उस पिआनो का क्या हुआ होगा। शायद ये स्मिथसोनियम संस्थान में हो या मैट्रोपोलिटन संग्रहालय में, शायद नाजियों द्वारा लकड़ियां जलाने के काम में लाया गया हो।

जिस वक्त जर्मनी में नाज़ी आतंक शुरू हुआ, प्रोफेसर के परिवार ने अमेरिका में शरण ली। मिसेज आइंस्टीन प्रोफेसर की पैसों के मामले में अज्ञानता की एक मजेदार कहानी बताती हैं कि प्रिंस्टन विश्वविद्यालय वाले चाहते थे कि प्रोफेसर उनकी फैकल्टी में आ जायें और उन्होंने शर्तों के बारे में लिखा। प्रोफेसर ने इतनी मामूली रकम लिखी कि प्रिंस्टन के अध्यक्ष का उत्तर आया कि जिन शर्तों पर वे आना चाहते हैं, उस पर यहां पर उनका गुज़ारा नहीं हो पायेगा और उन्हें अमेरिका में रहने के लिए उसके कम से कम तीन गुना रकम की ज़रूरत पड़ेगी।

जब प्रोफेसर आइंस्टीन 1937 में दोबारा कैनिफार्निया में आये तो वे मेरे घर आये। उन्होंने मुझे प्यार से गले लगा लिया और मुझे चेतावनी दी कि वे अपने साथ तीन संगीतकार ला रहे हैं। "हम आपके लिए डिनर के बाद संगीत बजायेंगे।" उस शाम प्रोफेसर मोज़ार्ट के साजिंदे जैसे लग रहे थे। हालांकि उनका हस्त लाघव इतना आश्वस्त नहीं था, और उनकी तकनीक थोड़ी मुश्किल थी, फिर भी उन्होंने आनंद ले कर आंखें बंद करके लहराते हुए बजाया।

तीनों संगीतकार, जिन्होंने प्रोफेसर की संगत के लिए बहुत अधिक उत्साह नहीं दिखाया, विनम्रतापूर्वक यही संकेत दिया कि वे प्रोफेसर को आराम देना चाहते हैं और अपनी मनमर्जी का बजाते रहे। प्रोफेसर ने हार मान ली और बैठ गये। लेकिन जब उन्होंने कई चीजें बजा लीं तो वे मुझसे फुसफुसा कर बोले," मैं दोबारा कब बजाऊंगा?"

जब संगीतकार चले गये तो मिसेज आइंस्टीन ने थोड़ा परेशानी में अपने पति को आश्वस्त किया,"आपने उन लोगों से बेहतर बजाया।"

कुछ ही रातों के बाद आइंस्टीन दोबारा खाने पर आये मैंने तब मैरी पिकफोर्ड, डगलस फेयरबैंक्स, मेरियन डेविस, डब्ल्यू आर हर्स्ट, और एकाध और दोस्त को भी आमंत्रित किया। मेरियन डेविस आइंस्टीन के पास बैठी और मिसेज आइंस्टीन मेरी दायीं तरफ हर्स्ट के साथ बैठीं। डिनर से पहले लगा कि सब कुछ ठीक ठाक है, हर्स्ट अच्छे मूड में थे और आइंस्टीन विनम्र। लेकिन जैसे जैसे डिनर आगे बढ़ा, मैं महसूस कर पाया कि मामला कुछ ठंडा चल रहा है क्योंकि दोनों ने आपस में एक शब्द भी नहीं बोला। मैंने बातचीत में जीवंतता लाने की हर संभव कोशिश की लेकिन कोई भी बात उन्हें आपस में बात करने के लिए प्रेरित न कर सकी। डाइनिंग रूम में भयंकर सन्नाटा पसर गया और मैंने देखा कि हर्स्ट अपनी स्वीट डिश की प्लेट में अफसोसजनक तरीके से देख रहे हैं और प्रोफेसर मुसकुरा रहे हैं और शांत अपने ही ख्यालों में खोये हुए हैं।

मेरियन अपने मनमौजी तरीके से सबकी चुटकी लेती रही लेकिन आइंस्टीन पर कोई फर्क नहीं पड़ा। अचानक ही मेरियन आइंस्टीन की तरफ मुड़ी और अजीब तरीके से बोली,"हालो," और फिर अपने हाथ की बीच की उंगलियां उनके सिर की तरफ लहराती हुई बोली, "आप अपने बाल क्यों नहीं कटवा लेते?"

आइंस्टीन मुस्कुराये और मुझे लगा कि यही समय है कि कॉफी के लिए ड्राइंगरूम की तरफ चला जाये।

रूसी फिल्मकार आइंस्टीन अपने स्टाफ के साथ हॉलीवुड आये। उनके साथ ग्रिगोर एलेक्सान्द्रेव और एक अंग्रेज इवॉर मोंटेग्यू भी थे। ये आइंस्टीन के मित्र थे। मैं उन्हें कई बार मिला। वे मेरे टैनिस कोर्ट पर बहुत ही खराब टैनिस खेलते थे, खास तौर तो एलेक्सांदर तो बहुत ही खराब।

आइंस्टीन को पेरामाउंट कम्पनी के लिए एक फिल्म बनानी थी। वे पोटेमकिन और टेन डेज़ दैट शूक द वर्ल्ड की प्रसिद्धि के साथ आये थे पैरामाउंट ने इसे कारोबार के हिसाब से उचित समझा कि उन्हें अपनी खुद की लिखी पटकथा पर फिल्म बनाने के लिए कहा जाये। उन्होंने एक बहुत ही अच्छी पटकथा लिखी सटर्स गोल्ड। इसे उन्होंने कैलिफोर्निया के शुरुआती दिनों की एक रोचक कथा से उठाया था। फिल्म में किसी तरह का कोई प्रचार नहीं था लेकिन आइंस्टीन चूंकि रूस से थे, पैरामांउट बाद में डर गये और फिर कुछ भी नहीं हुआ।

उनके साथ एक दिन साम्यवाद पर बात करते हुए मैंने पूछा कि क्या वे सोचते हैं कि पढ़ा लिखा प्रोलेतेरियन मानसिक रूप से एरिस्टोक्रेट के साथ अपनी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के साथ बराबरी पर खड़ा होता है, मेरा ख्याल है उन्हें मेरी अज्ञानता पर हैरानी हुई थी। आइंस्टीन जो रूस के इंजीनियरों के मध्यम स्तर के परिवार से आये थे, बोले, "यदि पढ़ा लिखा हो तो जनता की मिली जुली ताकत समृद्ध नयी जमीन की तरह होती है।"

उनकी फिल्म इवान द टैरिबल जिसे मैंने दूसरे विश्व युद्ध के बाद देखा, सभी ऐतिहासिक फिल्मों में से सबसे अच्छी थी। उन्होंने इतिहास को कविता की तरह पेश किया था। उससे निपटने का सबसे अच्छा तरीका यही था। जब मैं महसूस करता हूं कि हाल ही की घटनाएं किस तरह से विकृत हो गयी हैं, इस तरह से इतिहास मेरी सिर्फ शंकाएं ही बढ़ाता है जबकि कविता के रूप में व्याख्या काल के सामान्य प्रभाव को ग्रहण करती है। आखिर कला में इतिहास की किताबों की तुलना में अधिक वैध तथ्य और ब्योरे होते हैं।


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