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कविता

तेरे ही भुजानि पर भूतल को भार
भूषण


तेरे ही भुजानि पर भूतल को भार,
कहिबे को सेसनाग दिननाग हिमाचल है।
तेरौ अवतार जग-पोषन-भरनहार,
कछु करतार कौ न तो मधि अमल है।
साहितनै सरजा समत्थ सिवराज कबि,
भूषण कहत जीवो तेरो ही सफल है।
तेरो करवाल करै म्लेच्छन को काल बिन,
काज होत काल बदनाम भूमितल है।।


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