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कविता

कौन करै बस बसुहि कौन यहि लोक बड़ो अति
भूषण


कौन करै बस बसुहि कौन यहि लोक बड़ो अति।
को साहस को सिन्धु कौन रज लाज धरे मति।।
को चकवा को सुखद बसै को सकल सुमन महि।
अष्ट सिद्धि नव निद्धि देत माँगे को सो कहि।।
जग बूझत उत्तर देत इमि, कवि भूषण कविकुलसचिव।
दच्छिन नरेस सरजा सुभट साहिनंद मकरंद सिव।।


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हिंदी समय में भूषण की रचनाएँ