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कविता

तेरौ तेज सरजा समथ्थ दिनकर सो है
भूषण


तेरौ तेज सरजा समथ्थ दिनकर सो है,
दिनकर सोहै तेरे तेज के निकर सौ।
भ्वैसिला भुवाल तेरौ जस हिमकर सो है,
हिमकर सोहै तेरे जस के अकर सौ।
भूषन भनत तेरौ हियौ रतनाकर सौ,
रतनाकर है तेरे हिय सुखकर सौ।
साहि के सपूत सिव साहि दानी तेरौ कर
सुरतरु सो है सुरतरु तेरे कर सौ।।


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हिंदी समय में भूषण की रचनाएँ