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कविता

कामिनि कंत सों, जामिनि चंद सों
भूषण


कामिनि कंत सों, जामिनि चंद सों,
दामिनि पावस-मेघ घटा सों।
कीरति दान सों, सूरति ज्ञान सों,
प्रीति बड़ी सनमान महा सों।
'भूषन' भूषण सों तन ही'
नलिनी नव पूषण-देव-प्रभा सों।
जाहिर चारिहु ओर जहान लसै
हिंदुआन खुमान सिवा सों॥


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हिंदी समय में भूषण की रचनाएँ