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कविता

ग्लोबल वार्मिंग
निशांत


जहाँ एक पेड़ को होना चाहिए था
वहाँ एक हीरो-होंडा खड़ा है।

जहाँ एक हीरो-होंडा को होना चाहिए था
वहाँ एक सूअर का बच्चा खड़ा है।

जहाँ सूअर को होना चाहिए था
वहाँ एक विशाल लंबा और महान आदमी खड़ा है।


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हिंदी समय में निशांत की रचनाएँ