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कविता

उसका रोना
निशांत


उसके बोतल का नाम मिल्टन है
उस से वह पानी पीती है
वह उसका प्रिय बोतल है

बोतल खो गई
वह रोने लगी
इतनी रोई इतनी रोई कि
आँसुओं के जल में बहकर बोतल उस तक वापस आ गया

रोने को एक हथियार की तरह
वह करती है प्रयोग

बचपन का वह हथियार
आज भी कारगार है

अभी अभी सिर्फ आँखें भरकर
रोक लिया है उसने
चौथा विश्वयुद्ध

कभी कभी रोना
दुनिया को तबाह होने से बचाता भी है।


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