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कविता

अकेले में तुम्हारी उपस्थिति
निशांत


बियाबाँ में
एक पेड़ खिंचता है

समुद्र में एक डोंगी

भीड़ में तुम

अकेले में
तुम्हारी उपस्थिति।


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हिंदी समय में निशांत की रचनाएँ