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कविता

एक प्रधानमंत्री को याद करते हुए
निशांत


अँधेरे में एक चिड़िया बोली
कोई जानवर बोला
अंदर भी कोई बोला

वही नहीं बोला
नहीं बोला
चुप्पा कहीं का


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हिंदी समय में निशांत की रचनाएँ