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कविता

मधुमेह
लीना मल्होत्रा राव


हो जाए अगर साथी को मधुमेह
मत छोड़ देना उसे उसके हाल पर
रगड़ देना थोड़े पाँव
एड़ी ऐसे में साथ छोड़ देती है
अंतरिक्ष में गिरी वस्तु की तरह
नहीं महसूस होता उसे गुरुत्वाकर्षण
हो सकता है तुम्हारा साथी कहे
कि ठोंक दो एड़ी पर घोड़े की नाल
ताकि
महसूस कर सकूँ इसे मैं अपने शरीर के एक अंग की तरह

वह कहेगा कि
उसके दिल को लगातार एक चूहा खा रहा है
तुम उस चूहे को मार डालो
कहीं चूहा कुतर-कुतर कर उसके पूरे दिल को न खा जाए
उस दिल पर तुम्हारा नाम लिखा है
वह तुम्हें अपनी टाँगों पर उभरे लाल फफोले दिखाएगा और कहेगा देखो
ये चींटियों की एक बस्ती है
जो रात भर उसकी टाँगों को एक सड़क कर दौड़ाती रहती हैं
इनकी बस्ती को कहीं और स्थानांतरित कर दो
यह मुझे सोने नहीं देतीं

अपने बढ़े हुए रक्तचाप के बारे में
हो सकता है वह तुमसे कहे, उसके सर पर एक बंदर सवार है
जो
पेड़ की डालियों की तरह उसके सर को यूँ झिंझोड़ रहा है
कि उसे लगता है कहीं टप-टप करती हुई लीचियाँ न गिरने लगें
जिसके काँटे उसके सर के बालों के नीचे छिपे हुए हैं

कभी घर का सबसे छोटा बच्चा भागता हुआ आएगा
और कहेगा कि बाथरूम में चींटियों की सू-सू पार्टी चल रही है
अपने दर्द को छिपा कर वह भी हॅंसेगा, ठठा कर
तब तुम उसकी हॅंसी के साथ दर्द में भी शामिल रहना
शांति से सुनना उसकी बीमारियों की सूची
यह मधुमेह है, जो अकेले नहीं आता
साथ लाता है किडनी की छलनी का ढक्कन
कोलेस्ट्रोल जमने लगता है, धमनियों के नाले - नालियों में
अॅंतड़ियाँ मचाती हैं शनि मंदिर के बाहर बैठे याचकों की तरह हर समय भूख की चीख-पुकार
हाथ भर की दूरी पर रखना बिस्किट या रोटी
उसके मुँह की दुर्गन्ध से मत करना घृणा
उसमे हिरनों की तरह सहमे हुए कुछ घायल दाँत हैं
मदद करना
मत छोड़ देना अकेला साथी को
जिसका शरीर कसाई के हाथ में लटके मुर्गे की तरह तड़पता है जीवन के लिए


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