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व्यंग्य

भविष्य का भारत
राजकिशोर


पड़ोसी के लड़के आदित्य ने जब भारत के भविष्य का नक्शा मेरी मेज पर रखा, तो मेरी आँखें खुली की खुली रह गईं। आदित्य एक निबन्ध प्रतियोगिता में भाग ले रहा है। प्रतियोगिता का विषय है - भारत में शान्ति। अन्य छात्रों की तरह आदित्य ने इन्टरनेट, अंकलों और आंटियों की मदद नहीं ली। लेख लिखने का यह सबसे आसान रास्ता था। आदित्य ने कठिन रास्ता चुना। उसने कई दिनों से इस विषय पर खुद सोचा। नतीजा मेरे सामने था।

आदित्य ने भारत का एक नया ही नक्शा खींच डाला था। इस नक्शे में एक राष्ट्र की जगह पाँच राष्ट्र थे। पाँचों के बीच मोटी-मोटी लाइन ऑफ कंट्रोल थी। पुलिस राइफल लिए गश्त लगा रही थी। आदित्य के अनुसार, भारत को तोड़ कर उसमें से पाँच भारत बना दिए जाएँ, तो शांति अपने आप स्थापित हो जाएगी। समाज के भीतर समरसता होगी और कोई भी समुदाय दूसरे से नहीं लड़ेगा। भारत के नए विभाजन का किस्सा आदित्य के मुँह से ही सुनिए।

‘अंकल, यह देखिए। यह रहा हिन्दू भारत। इसे मैंने केसरिया से रँग दिया है। यहाँ देश भर के हिन्दू रहेंगे। अपने इलाके में वे चाहे जिस मस्जिद या चर्च को तोड़ें, यह उनके अधिकार क्षेत्र में होगा। इसके खिलाफ किसी भी कोर्ट में नहीं जाया जा सकेगा। यहाँ अगड़े और पिछड़े के बीच युद्ध तो हो सकता है, पर अल्पसंख्यकों का दमन तो हो ही नहीं सकता। कारण, इस भारत में अल्पसंख्यक होंगे ही नहीं।

‘अल्पसंख्यकों के लिए मैंने तीन अलग-अलग भारत बनाए हैं। एक बड़ा-सा इलाका मुसलमानों को दिया है। इस इलाके में सिर्फ मुसलमान रह सकेंगे। इससे हिन्दू-मुस्लिम समस्या हल हो जाएगी। एक इलाका सिखों को दिया है। भारत विभाजन से इस बहादुर कौम की आकांक्षाएँ पूरी नहीं हुई थीं। अब हो जाएँगी। एक छोटा-सा इलाका ईसाइयों के लिए बनाया है। दुनिया में कौन नहीं जानता कि भारत मूलतः धार्मिक देश है। इसलिए धर्म के आधार पर ठीक से विभाजन कर दिया जाए, तो अशांति की जड़ ही खत्म हो जाएगी।

‘अंकल, यह देखिए, यह इलाका दलितों के लिए है। इस देश में सिर्फ दलित रहेंगे। उसके बाद वे यह शिकायत नहीं कर सकेंगे कि सवर्ण समाज हमें सता रहा है। इस इलाके में सवर्ण लोग नहीं रह सकेंगे। इससे उनकी यह शिकायत दूर हो जाएगी कि दलित हमारे सिर पर चढ़े आ रहे हैं। कैसा है मेरा यह प्लान?’

मैंने पूछा, ‘लेकिन बेटे, बिहार और यूपी के जिन लड़कों को महाराष्ट्र में पीटा गया, वे भी हिन्दू हैं और जिन्होंने पीटा, वे भी हिन्दू हैं। तो फिर तुम्हारे भारत में, या कहो भारतों में, शांति कैसे बनी रह सकती है? लखनऊ के शिया-सुन्नी दंगे मशहूर हैं।’

‘इसका समाधान भी मैंने सोच लिया है। मैं सिफारिश कर रहा हूँ कि मुस्लिम भारत में शिया और सुन्नी चाहें तो अपने देश का एक और विभाजन कर सकते हैं। शियाओं का देश अलग और सुन्नियों का अलग। इसी तरह, दलितों की विभिन्न जातियों में न पटे, तो उनमें से हरएक को अलग-अलग देश दिया जाएगा। हिन्दू भारत भी चाहे तो जातियों के आधार पर अपने को पुनर्विभाजित कर सकता है, जैसे गाँवों में ब्राह्मणों, ठाकुरों, बनियों चमारों की टोलियाँ अलग-अलग होती हैं।’

मेरा गला खुश्क होने लगा था। मैंने कहा, ‘शायद तुम ठीक कहते हो। प्रेम बनाए रखने के लिए कुछ दूरी जरूरी है। करीबी से कलह बढ़ता है।’

आदित्य ने कहा, ‘अब तो अदालत ने भी मान लिया है कि जो साथ-साथ नहीं रह सकते, उन्हें अलग हो जाना चाहिए। कपूर आन्टी को तो इसी आधार पर तलाक मिला है। कपूर अंकल से रोज उनका झगड़ा होता था। अदालत ने यह नहीं कहा कि झगड़ा करना बन्द करो। उसने दोनों को अलग-अलग रहने की छूट दे दी। कितना आसान समाधान है। बुराई न मिटे, पर शान्ति कायम हो जाए। जो बात व्यक्तियों पर लागू होती है, वही समुदायों पर भी। भारत में तो तभी शान्ति होगी, जब हर सम्प्रदाय, हर समुदाय को अपना अलग देश मिल जाएगा। न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी।’

मैंने जिज्ञासा प्रगट की, ‘जम्मू-कश्मीर के बारे में क्या सोचा है?’

आदित्य ने कहा, ‘मेरी योजना लागू कर दी जाए, तो यह समस्या अपने आप हल हो जाएगी। जम्मू के लोग हिन्दू भारत में आ जाएँगे, कश्मीर के मुसलमान मुस्लिम भारत में। सारा झगड़ा ही खत्म हो जाएगा। सभी को आजादी मिल जाएगी।’

‘लेकिन कश्मीरी मुसलमान भारत के दूसरे मुसलमानों के साथ रहना पसंद करेंगे?’

‘अंकल, यह उनकी समस्या है। और यह बँटवारा ऐसे ही थोड़े हो जाएगा? देश में बड़े पैमाने पर जनमत संग्रह किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो बार-बार जनमत संग्रह करवाया जाएगा। उसके बाद देश के बड़े-बड़े बुद्विजीवियों को लेकर भारत विभाजन आयोग गठित किया जाएगा। अरुंधति राय जैसा कोई व्यक्ति इस आयोग का महासचिव होगा। आयोग की रिपोर्ट पर संसद में विचार होगा। तब जा कर यह ऐतिहासिक कार्य संपन्न हो पाएगा।’

मैंने जिज्ञासा प्रगट की, ‘अच्छा, यह बताओ, तुम्हारी योजना में हमारे जैसे लोगों का क्या होगा, जो न धर्म को मानते हैं न जाति को?’

आदित्य मुसकराते हुए बोला, ‘यह बात शुरू से ही मेरे दिमाग में थी। अगर ऐसे लोगों की संख्या बीस लाख से ज्यादा हुई, तो इन्हें भी एक छोटा-सा देश मिलेगा।’

तब तक मेरी पत्नी तश्तरी में फल और मिठाई ले कर आ गई थी। उसने पूछा, ‘लेकिन बेटे, तुम्हारी योजना में हम स्त्रियों का क्या होगा? हम कहाँ रहेंगी?’

आदित्य चक्कर में पड़ गया। ठुड्डी खुजलाते हुए बोला, ‘आंटी, क्या औरतों को भी अलग देश चाहिए? तब तो सारा बंटाधार हो जाएगा। वे वहीं जाएँगी जहाँ उनका परिवार जाएगा।’

पत्नी ने हँसते हुए पूछा, ‘क्यों, क्या औरतों को आजादी नहीं चाहिए।’

आदित्य विचारों में खो गया।

मैंने उसके चिंतन में बाधा डाली, ‘और बेटे, तुम? तुमने अपने लिए इनमें से कौन-सा देश चुन रखा है?’

आदित्य हँसने लगा, ‘अंकल’, आप भी अजीब सवाल पूछते हैं। मुझे भारत में रहना ही नहीं है। आईआईटी पूरा होते ही मैं स्टेट्स चला जाऊँगा। वहाँ मेरे एक सगे अंकल हैं, दो मामा हैं और तीन कजन हैं। इनमें से हरएक ने कहा है, इम्तहान दे कर तुरन्त प्लेन पकड़ लेना। अब तो पापा भी वहीं सेटल करना चाहते हैं। पापा ने कह रखा है, पहले तुम चलो, पीछे-पीछे हम भी आ जाएँगे।’


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