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कविता

रंग
नरेश सक्सेना


सुबह उठ कर देखा तो आकाश
लाल, पीले, सिंदूरी और गेरुए रंगों से रँग गया था

मजा आ गया, 'आकाश हिंदू हो गया है'
पड़ोसी ने चिल्लाकर कहा
'अभी तो और मजा आएगा' मैंने कहा
बारिश आने दीजिए
सारी धरती मुसलमान हो जाएगी।

 


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हिंदी समय में नरेश सक्सेना की रचनाएँ