डाउनलोड मुद्रण

अ+   अ-

कविता

दीवारें
कुँवर नारायण


अब मैं एक छोटे-से घर
और बहुत बड़ी दुनिया में रहता हूँ

कभी मैं एक बहुत बड़े घर
और छोटी-सी दुनिया में रहता था

कम दीवारों से
बड़ा फर्क पड़ता है

दीवारें न हों
तो दुनिया से भी बड़ा हो जाता है घर।

 


End Text   End Text    End Text

हिंदी समय में कुँवर नारायण की रचनाएँ



अनुवाद