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कविता

ऐंठन का दर्द
सुरजन परोही


गरीब के छत-ऊपर
अमीर का बचपन

गरीब नहीं जानता है
खाने का स्वाद
वह सिर्फ
जानता है - भूख का स्वाद सुख की अँगड़ाई नहीं
ऐंठन का दर्द

 


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हिंदी समय में सुरजन परोही की रचनाएँ