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कविता

संत तुलसीदास की कथा सुनो
सुरजन परोही


संत तुलसीदास की कथा सुनो
जो भारत के महाकवि कहलाते हैं

भारत एक देश है जहाँ अद्भुत लीलाएँ होती रहती हैं
ऐसे ही, एक विचित्र पुरुष की कहानी हमें भी मिलती है
बांदा जिला, राजापुर गाँव में, जन्म एक बालक गुमनाम
माता थी हुलसी देवी, और पिता ब्राह्मण आत्माराम
जिनकी महिमा भारत के इतिहासों में
गौरव गान सुनाते हैं

संत तुलसीदास की कथा सुनो
जो भारत के महाकवि कहलाते है

बालपन में केवल निंदा, गाली, बदनामी के विष पीता रहा
पग-पग पर ठोकर खाया, आँसू पीकर वह जीता रहा
अनाथ बेसहारा पर कृपा किया, गुरु नरहरिदास
बना दिया उस बालक को रामबोला से संत तुलसीदास
आज वही शिरोमणि
रामभक्‍त के नाम से जाने जाते हैं

संत तुलसीदास की कथा सुनो
जो भारत के महाकवि कहलाते हैं

दीनबंधु पाठक की कन्या, रत्नावली बड़ी भाग्यशाली है
होता है तुलसी से मेल, देखो प्रभु की लीला कैसी निराली है
तुलसी और रत्नावली का शुभ घड़ी में विवाह संपन्‍न हुआ
बड़े हर्ष और प्रेम में मग्न थे उधर नारी मार्गदर्शक बन गई

संत तुलसीदास की कथा सुनो
जो भारत के महाकवि कहलाते हैं

रत्ना क्या बोली तुलसी से
'लाज न लगत आपका, दौरे आयई साथ
धिक-धिक ऐसे प्रेम को कहा कहूँ मैं नाथ
अस्थि चर्म भय देह मन, तामे जैसी प्रीत
तैसी जो श्रीराम से होत न हो भयभीत'
नैया पर होती है उनकी
जो भगवान से नेह लगाते हैं

संत तुलसीदास की कथा सुनो
जो भारत के महाकवि कहलाते हैं

पत्नी को गुरुमाता माना,
हनुमान मंदिर का आश्रय ले लिया
लेखनी में सरस्वती को बसाई,
और राम कृपा से श्री गणेश कर दिया
बड़े-बड़े ग्रंथों को रचा,
हिंदी साहित्य को ऊँचा स्थान दिया
भारतीय परंपरा का अनमोल खजाना,
जो रामचरितमानस रच दिया
आज वही रामायण को
बड़े प्रेम और श्रद्धा से हम सब गाते हैं

संत तुलसीदास की कथा सुनो
जो भारत के महाकवि कहलाते हैं

2 साल, 7 महीने, 26 दिवसों में, सातों कांड और
500 चौपाई किया तैयार
पौराणिक, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और अलंकारिक में
भर दी राम की महिमा अपार
क्रोधहीन, सहनशील, संतोषी और शांतिप्रिय
चल गए सुरधाम
जब-जब श्रद्धांजलि अर्पण होता
तब-तब स्वयं दर्शन देता है श्रीराम|
ऐसे भक्त की बनाई हुई नैया से
हम पापी पार उतर जाते हैं

संत तुलसीदास की कथा सुनो
जो भारत के महाकवि कहलाते हैं

 


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