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कविता

आदमी और बाकी सब
अनंत मिश्र


झुकी हुई औरत
गर्दन पर बाल खोलती है
दिख गए मर्द को देखती है
और अंदर भाग जाती है,
औरत जब मर्द देखती है
तो अंग छुपाती है
मर्द जब औरत को देखता है
तो सीना फुलाता है,
चिड़िया जब चिड़िया को देखती है
चहचहाती है,
मैंने पेड़ से पूछा
आप क्या करते हैं श्रीमान
आदमी को देख कर ?
मैं देखता हूँ
कुल्हाड़ी नहीं है न उसके पास
और आश्वस्त हो जाता हूँ।

 


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