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कविता

खबरें
लीलाधर जगूड़ी


रोज खबरें आती हैं
लांछित और लज्जित होने की खबरें
उनकी कोई खबर नहीं आती
जिनमें लज्‍जा की भनक हो

जो अच्‍छे दिनों की कामना में
खराब जीवन जिए चले जाते हैं
जो उस जीवन से बाहर चला जाता है
उसकी खबर आती है

कहीं कोई शर्म से मरा
बताया यह गया उसमें साहस नहीं था
घबराहट थी! कुंठा थी! कायरता थी!

विपदाग्रस्‍त पीड़ित या मृत व्‍यक्ति की
असफलता दिखायी जाती है मौत में भी

घबराना खबर है। शर्म कोई खबर नहीं।

 


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हिंदी समय में लीलाधर जगूड़ी की रचनाएँ