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कविता

वाल-मार्ट अभ्यर्थना
मृत्युंजय


आओ-आओ मारट-वाल !

एफ्फ डीआई महिमा बाँचे,
पूँछ उठाए संसद नाचे,
अमरीकी हाकिम के आगे,
लकड़बग्गही भरैं कुलांचे
मुलुक बेचकर परम मुदित,
बाह, पुण्यफल भया उदित
छोटे-छोटे खेत-खेतिहर,
किसी जीव की नहीं गलेगी दाल
जायस-वाल औ' अगर-वाल को,
ठोंक पीटने आया मारट-वाल

ठेला-पट्टी, रेहड़ी-गुमटी,
अगड़म-बाईस, लाई-पट्टी
आँचा-पाँचा और किराना
और ढेकाना और फलाना
ताल ठोंककर नेताराम,
हत्या का कर इंतेजाम
नामी चोरों के घोड़ों की,
टापों में ठुँकते ज्यों नाल
जायस-वाल औ' अगर-वाल को,
ठोंक पीटने आया मारट-वाल

छोटे बनिया औ ब्योपारी,
लकड़ी-रासन औ तरकारी
सभी बिकेगा बड़े मॉल में,
बेरोजगारी औ लाचारी
थोक भाव से उपजाएँगे,
स्विस बैक में रख खाएँगे
यही दलाली, चटपट माल,
परम सुचिक्कन होंगे गाल
जायस-वाल औ' अगर-वाल को,
ठोंक पीटने आया मारट-वाल

आओ हम सब लेयं बलइया,
आय पधारे हैं हतवईया
निज चमड़े की सड़क बनावें,
सुखी होयं बिधि के रचईया
हमैं लूटि के हमहिं बतावैं,
का मोर नाँव, कौन मोर ठइयाँ
देश बना गंधाता ताल,
छोट-छोट माछ, बिदेशी जाल
जायस-वाल औ' अगर-वाल को,
ठोंक पीटने आया मारट-वाल

आओ आओ मारट वाल
चिकनी संसद चिकनी खाल
दोनों हाथ रहे तर माल
हमने तो निज आस्तीन में
पाले ही हैं विषधर ब्याल
आए इसी अभागी भू पर
भूखमरी कुछ और अकाल

 


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