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कविता

चुनाव के चार चरण
धरीक्षण मिश्र


पहिला चरण (सवैया) :-

ध्रुव निश्‍चित आपन जीति बुझीं अबकी उठि के तनि सामने आयीं ।
हमरा सबके रुख मालुम बा बतिया हमरो सुनि लीं पतियायीं ।
अवरी सब बाद में होत रही परचा पहिले करीं दाखिल जायीं ।
सब कार के जिम्मा हमार रही रउरा न मनें तनिको घबड़ायीं ।।1।।
हऊ बाड़े खड़ा उनसे न डरीं उनके एहि में हम खेह खियाइब ।
उनके जहाँ जाति जियादे बसें उहवा उनके एगो जाति उठाइब ।
लरिका कुछ और पियक्कड़ जोरि के साँझ सबेरे जलूस घुमाइब ।
सुनवाइब गारी भले उनके आ जमानत जब्त जरूर कराइब ।।2।।


दूसरा चरण (कवित्‍त) :-

घेरि घेरि ग्रह के उपग्रह पढ़ावें पाठ
झण्डा आठ बीस जा के देखी बा हलि गइल ।
जेतना विरोधी का प्रचार के प्रभाव रहे
आज एक दौरा में सगरे निकलि गइल ।
जहाँ जहाँ जाके जनता के समुझौनी हम
तहाँ तहाँ मानीं कि नकशे बदलि गइल ।
अब्बे त नब्बे परसेण्ट तक मानीं आपन
औरी बढ़ि जाई जो ऊहो युक्‍ति चलि गइल ।।3।।


तीसरा चरण (कवित्‍त) :-

कम्बल बा एके तब लेके उहो जाई कहाँ
लैकन का ओढ़े के घरहीं छोड़ि आइले ।
पैदल त हमरा से चलिये ना जात ज्यादे
एसे ढेर दूर ले ना चक्कर लगाइले ।
काम और तेजी से करे के हम चाहS तानीं
किन्तु ओतना तेजी से करि नाही पाईले ।
कोट बा पुरान ओमें सन्न दे बयारि मारे
बानी कमजोर देहि ठण्ड से बचाईले ।।4।।


चौथा चरण (कवित्‍त) :-

का बताईं ऐसन जमाना ई खराब बा कि
केहुवे में ना धर्म बाटे आ ना ईमान बा ।
हमरा से औरे कुछ रउरा से औरे कुछ
कहे के बा ना कुछ जबान के ठेकान बा ।
बड़े बड़े लोगन के चीन्हि लेनी एमें हम
कहे के बा आन तS करे के किछु आन बा ।
एक त चुनाव बिना पेनिये के लोटा हवे
आजे के ना हवे ई कहाउत पुरान बा ।।5।।

 


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