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कविता

परिवर्तन के सूचक सात
धरीक्षण मिश्र


पन्द्रे सौ सताइस में बाबर के राज भैल
हारि भैल छब्बिस में लोदी अफगान के ।
मुवले औरंगजेब सत्रह सौ सात बीच
छिन्न भिन्न राज भैल मुगल खन्दान के ।
सत्रे सौ सन्तावन में पलासी के युद्ध भैल
कम्पनी का हाथे गैल जिला बर्दवान के ।
अठारे सौ सन्तावन में भैल विद्रोह भारी
आइ गैल बेरा विक्टोरिया फरमान के ॥
उन्निस सौ सताइस में नून सत्याग्रह में
भैल अवज्ञा वृटिश शासन विधान के ।
उन्निस सौ सैतिस में काँगरेसी मन्त्री लोग
लागल चलावे राज पूरा हिन्दुस्तान के ।
भारत से गोरा लोग भागल सैंतालिस में
और नेंव डालि गैल इहाँ पाकिस्तान के ।
कहियो ना भैल तवन भैल मार काट इहाँ
दूनूँ जाति नष्ट भैल हिन्दू मुसलमान के ॥
शेष भाग भारत में राम राज भैल आ की
कौन राज भैल बा ना लिखला का मान के ।
जामवन्त अंगद सुग्रीव नल नील सभे
मुँह बा के देखि लिहल खेला ईमान के ।
शासन दल के कुर्सी समूचा जब छेंकि बैठल
एके दल खानी करिमूहाँ हलुमान के ।
एही दुखें सात मास बीतहीं के रहे तौले
जामवन्त1 गति अपनौले अन्तर्ध्यान के ॥
शेष दल बानर के लागल अधीर होखे
कब ले ई लोग भला ताको मुँह आन के ।
बीसन बरीसन से लोगो रहे ऊबि गैल
करिया मुँह बानर का भारी जियान से ।
सरसठ2 में सर सठ3 भैले अनेक जने
आइल झकोरा बड़ा शासन बिधान के ।
असली लोकतंत्र भैल उत्‍तर प्रदेशो में
मन्त्री लोग भैल सात दल का प्रधान के ॥

मई सताइस के भइल, नेहरू के अवसान ।
भारत से इक उठि गइल, सत्‍ता ईश महान ॥
सात मास तक चलल जब, संविद के सरकार ।
ओहू में लागल चले, फूट-फाट के कार ॥
दू वर से न वियाह हो, एकवर पशु न किनात ।
छवर न केहु छोड़े चहें, सब चाहें वर सात ॥

 


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