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कविता

बुढ़ापा
अरुण कमल


(बादशाह खान के प्रति)

बुढ़ापे का मतलब है सुबह शाम
खुली हवा में टहलना बूलना
बुढ़ापे का मतलब ताजा सिंकी रोटियाँ
शोरबे में डबो डबो खाना
बुढ़ापा यानी पूरे दिन खाट पर
हुक्‍का गुड़गुड़ाना, आते जाते
किसी भी आदमी को रोक कर
खैरियत पूछना
बुढ़ापा यानी पूजा ध्‍यान और तसबीह के दाने
बुढ़ापा यानी पोते पोतियों को गोद में भरे
बैठना निश्चिंत, परियों के किस्‍से सुनाना

मगर बुढ़ापे का मतलब बादशाह ख़ान भी है
बुढ़ापे का मतलब
         खुली हवा के लिए
         रोटी और शोरबे के लिए
         दुनिया भर के पोते पोतियों के लिए
गिरफ्तारी जेल और पीठ पर कोड़े
जुल्‍म के खिलाफ लड़ने की उम्र कभी खत्‍म नहीं होती
उम्र दराज हो तुम्‍हारी, चिनार देवदारु बादशाह ख़ान 
         न विवशता न थकान न स्‍यापा
         हो, तो जिंदगी की नोक हो बुढ़ापा

 


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