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कविता

बैलेंस शीट
सर्वेंद्र विक्रम


अप्रैल से मार्च वाले स्वदेशी
या जनवरी से दिसंबर वाले विदेशी
किस वित्तीय वर्ष में दर्शाएँगे हमारा मुनाफा
तिमाही या रबी-खरीफ-जायद के हिसाब से चौमासा
बनाएँगे हमारी भी बैलेंस शीट ?

पिछली बाढ़ के बाद बीज भी नहीं बचा
कर्ज पर खाद-पानी
समर्थन-मूल्य की घोषणा के बावजूद
तय नहीं है कटेगा तो किस भाव बिकेगा
खड़ा गन्ना खेत में जलाना पड़ा
फालतू पैदा हो गया आलू, सड़ा
उसे दर्ज करेंगे ?
जोतते हेंगाते निराते गोड़ते रहे
पाले कोहरे में रात-रात पानी में खड़े रहे
गोरुओं के साथ गोरू हुए गोबर हुए
अँजुरी भर धान गेहूँ के लिए आठों पहर का जंजाल
किस रेट जोड़ेंगे औरतों और बच्चों की मजूरी ?
हारी बीमारी जूड़ी ताप जैसे शुद्ध लाभ
आत्महत्याओं को मानेंगे निवेश ?
आप ही बताइए सरकार हम भी हैं मुनाफे के हकदार ?


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