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कविता

मूर्ति
सर्वेंद्र विक्रम


विश्वास दिला दिया गया
पुरानी इमारतें स्थापत्य के नमूने खत्म हो जाने से
लोगों की समझ कम हो जाती है मानवीय संभावनाओं के बारे में
इसलिए चाहिए खूबसूरत महल मकबरे हौज और हम्माम
स्तंभ और स्तूप गुंबद गोपुरम मंडप और मूर्तियाँ
मस्जिद और मंदिर

विश्वास दिला दिया गया
इमारतों के शिल्प और मनुष्यों की गतिविधियाँ
एक दूसरे को आकार देते हैं
ये ढाँचे मनुष्य के होने और गुजर जाने के चिह्न हैं

जनता के लिए इस कला की पुनर्खोज के लिए
बाहर से भी आएँगे सैलानी व्यापारी

अपने गौरवशाली अतीत के सिवा और है ही क्या
गरीब देश में गरीब लोगों के पास गर्व के लिए

जरूरी है लोग भव्य इमारतों के निरंतर संपर्क में रहें
उन्हें अहसास रहे
खूबसूरती में हैं कितनी संभावनाएँ
पत्थरों के शिल्प में तलाशना चाहिए निर्वाण

और तब शुरू हुआ
मूर्तियाँ गढ़ने बनाने जगह जगह लगाने का चलन

एक सुबह आप उठें और आप पाते हैं
आप खड़े हैं एक भव्य मूर्ति के सामने
 


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