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कविता

मजमून
सर्वेंद्र विक्रम


जगहों पर कब्जा करने की नीयत के उलट
शब्दों के बीच स्पेस छोड़ने
ध्वनियों के आपसी संबंध के आधार पर शब्द चुनने
अक्षरों के दाएँ बाएँ झुकाव और इससे राजनीति में
उसकी जगह तय होने से

उसके बारे में कई तरह की भविष्यवाणियाँ की जा सकती थीं

प्रिय सुगंध और पेय महत्वपूर्ण तारीखों अनुकूल रंगों,
घर के आगे का लैंडस्केप
जीवन मरण को देखते हुए
तयशुदा ढंग से कहना कठिन है कि इसमें उसका किरदार है या नहीं
हालाँकि इसमें उसके बचपन में खोई चीजें हैं

जो कुछ जिस तरह से लिखा गया है उससे जाहिर है कि
लिखने वालों ने मशविरा करके तय किया होगा एक मुकम्मल मजमून

इससे बच पाना नामुमकिन है इस घेरेबंदी से निकल पाना
वही होगा जो कुछ उन्होंने तय किया है
और इसमें गुंजाइश नहीं है
असहमति, असंतोष और विवाद के लिए


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