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कविता

पानी
प्रभुनारायण पटेल


हजारों रंग का पानी -
उठती उमंग का पानी,
घूँघट के रंग का पानी,
पिया के संग का पानी।
जिंदगी एक लहर पानी,
आदतन है कहर पानी
मयकशी का जहर पानी,
उर्वशी का शहर पानी।
गरम साँस ने कहा पानी,
भरे बैसाख ने कहा पानी,
उठती आँख ने कहा पानी,
व्यथित मधुमास ने कहा पानी।
उनके चेहरे का उतर गया पानी,
उनकी हरियाली को कुतर गया पानी,
उनकी आँखों का मर गया पानी,
उजली पाँखों का झर गया पानी।


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