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कविता

रियायत
ईमान मर्सल


तुम्हें हर महीने तनख्वाह मिलती है क्योंकि राज्य अभी वजूद में है
और जब तक तुम्हारी अवसाद भरी आँखों में सूरज हलचल करता रहेगा
कुदरती कूड़ों की तफ्सील बयान करने के बहाने तुम्हें मिलते रहेंगे
इस तरह तुम ऐतिहासिक क्षणों में प्रवेश करती हो, उनके जुराबों के जरिए

रियायतों से खबरदार रहो
मसलन, कूड़े को ही देखो
वह सूअरों को खाना प्रदान करता है,
और सच में, पिछले राष्ट्रपति के शासनकाल के बाद से तो
हर चीज में सुधार हुआ है,
इतना कि मुर्दों के शहर तक में अब
अंतर्राष्ट्रीय फोन एजेंसियाँ लग गई हैं

निजी तौर पर मुझे किसी की आवाज नहीं चाहिए

रियायतों से खबरदार रहो
और भविष्य के बारे में तो बिल्कुल चिंता मत करो
तुम्हारे पास वह आजादी नहीं है जो मरने के लिए जरूरी होती है

 


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