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कविता

देवता
हरीशचंद्र पांडे


पहला पत्थर
आदमी की उदरपूर्ति में उठा

दूसरा पत्थर
आदमी द्वारा आदमी के लिए उठा

तीसरे पत्थर ने उठने से इन्कार कर दिया

आदमी ने उसे
देवता बना दिया

 


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हिंदी समय में हरीशचंद्र पांडे की रचनाएँ