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कविता

भूमंडलीकरण
मुकेश कुमार


उनकी चाकी उनकी चलनी, उनके ही राजा रानी
उनकी कथनी उनकी करनी, उनकी ही कथा कहानी
उनका खाना उनका पीना, उनका ही पहना बाना
उनका पढ़ना उनका गुनना, उनका ही गाना बजाना
उनकी भक्ति उनकी शक्ति, उनका गुन ही बखाना
वो ही सुंदर वो ही सपना, उनका ही सजना-सजाना
उनकी ताकत उनकी सत्ता, वो ही समर्थ बलवाना
उनकी मूरत उनकी महिमा, उनका ही हँसना रुलाना
हम ठहरे मूरख अज्ञानी, वो ही चतुर सयाना।।

 


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