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कविता

पत्थर
मुकेश कुमार


जिन्हें पूजा
हो गए पत्थर

पूजते-पूजते पत्थर
लोग भी हो गए पत्थर

देवता भी पत्थर
पुजारी भी पत्थर

सब पत्थर
बस पत्थर ही पत्थर

 


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