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कविता

जंगल का आदमी
प्रदीप त्रिपाठी


मैं
जंगल का आदमी
जंगल में रहना मुझे पसंद है।
मेरे लिए जिंदगी का होना
उतना महत्वपूर्ण नहीं
जितना कि एक जंगल का

अक्सर
मैं शहरों की तरफ भागता हुआ
दिख जाया करता हूँ
अपनी कुछ बची हुई
लकड़ि‌यों के गट्ठरों के साथ
इसका मतलब यह नहीं
मुझे
शहर में रहना भी पसंद है

मुझे पसंद है,
सिर्फ अपना जंगल
और उसका जंगलीपन
क्योंकि
मेरी पहचान सिर्फ जंगल से है
न कि किसी शहर से...

 


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