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कविता

तुम्हारे नाम को लेकर
प्रदीप त्रिपाठी


आँगन के पार
पल भर के संगीत के लिए
ढूँढ़ लेना चाहता हूँ, तुमको
सिर्फ तिनके की नोंक भर।
न जाने कैसा होगा
अब, तुम्हारा भविष्य
तुमसे उतनी घृणा तो पहले भी नहीं थी
न ही कभी अच्छी दोस्ती ही
फिर भी...
प्रायश्चित करूँगा
तुम्हारे नाम को लेकर
निःशब्द,
हमेशा-हमेशा
एक इतिहास के खातिर

 


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