hindisamay head
डाउनलोड मुद्रण

अ+ अ-

कविता

आज्ञा
आभा बोधिसत्व


तुमने उसको देखा क्यों
तुमने उससे बोला क्यों
बोल बोल कर तोला क्यों
जब हमने तुमको टोका ज्यों
तब भी दाँत निपोरा क्यों
जब तुम मेरी मर्जी हो
मेरी ही तुम अर्जी हो
बिन आज्ञा तब चलती क्यों
बिन आज्ञा तुम गलती क्यों
अपना धर्म मसलती क्यों
स्त्री हो अकड़ती क्यों
बिन जवाब तुम चलती क्यों
पीछे मुड़ कर अड़ती क्यों
ब्रहा से तुम बड़की क्यों
बोलो बोलो अड़ती क्यों
क्यों नहीं चुप रहती यों
आज्ञा जैसे मिलती हो

 


End Text   End Text    End Text