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कविता

प्रार्थना बनी रही
गोपाल सिंह नेपाली


रोटियाँ गरीब की प्रार्थना बनी रहीं
एक ही तो प्रश्न है रोटियों की पीर का

पर उसे भी आसरा आँसुओं के नीर का
राज है गरीब का ताज दानवीर का
तख्त भी पलट गया कामना गई नहीं
रोटियाँ गरीब की प्रार्थना बनी रहीं

चूम कर जिन्हें सदा क्राँतियाँ गुजर गईं
गोद में लिए जिन्हें आँधियाँ बिखर गईं
पूछता गरीब वह रोटियाँ किधर गईं
देश भी तो बँट गया वेदना बँटी नहीं
रोटियाँ गरीब की प्रार्थना बनी रही


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