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कविता

प्रिय मेरे गीले नयन
महादेवी वर्मा


प्रिय मेरे गीले नयन बनेंगे आरती !

श्वासों में सपने कर गुंफित,
बंदनवार     वेदना-चर्चित,
भर दुख से जीवन का घट नित,
मूक क्षणों में मधुर भरूँगी भारती !

दृग मेरे यह दीपक झिलमिल,
भर आँसू का स्नेह रहा ढुल,
सुधि तेरी अविराम रही जल,
पद-ध्वनि पर आलोक रहूँगी वारती !

यह लो प्रिय ! निधियोंमय जीवन,
जग की अक्षय स्मृतियों का धन,
सुख-सोना करुणा-हीरक-कण,
तुमसे जीता, आज तुम्हीं को हारती !

(सांध्य गीत से)

 


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