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कविता

सबसे ज्यादा
हरप्रीत कौर


सबसे ज्यादा चाहा तुम्हें
सबसे ज्यादा जिया बेटी के साथ
खेला बहन से सबसे ज्यादा
सबसे ज्यादा पकड़े जुगनू
सबसे ज्यादा देखा नीला रंग
एक नदी से मिला हर शाम
एक लड़की से ले ली विदा
सबसे ज्यादा छिपाया दुनिया से
सबसे ज्यादा झुका पिता के आगे
इस वर्ष सबसे ज्यादा उदास था मैं
रोया सबसे ज्यादा माँ के आगे
 


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