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कविता

व्यंजन पकाने की विधि
प्रयाग शुक्ल


व्यंजन पकाने की विधियाँ कई हैं
व्यंजन भी कई हैं
ढेरों व्यंजनों के
पर, व्यंजन विधियों को चकमा देकर
कब और कैसे स्वाद को
मधुर तिक्त करते हैं
यही चमत्कार है।

चाहें तो हम इसे रहस्य भी कह लें।
हाथों का जस
वह तो होता है
उससे भी बड़ी चीज वह मन है
जो व्यंजन पकाता है,
वह अदृश्य रहता है
स्वाद जो आता है जीभ पर
जान वह कैसे यह लेता है,
किस मन से व्यंजन पकाया गया।

सामग्री, वह तो सोची होगी
सामग्री बिन व्यंजन
यह तो सुना नहीं,
हाँ वह भी कैसे पकाई गई
यह महत्वपूर्ण है।

अंत तब यही होगा स्वाद का
कैसे जुटाए गए
सामग्री व्यंजन विधियाँ।


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