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कविता

सबसे पिछली कतार का आदमी
प्रयाग शुक्ल


सोचता है सबसे पिछली कतार
का आदमी
सारी अगली कतारों के बारे में।

कहता नहीं,
सोचता है -
हम सब हो सकते थे
एक ही कतार में -
बस आदमी !


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