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कविता

जाग रहे हैं
प्रयाग शुक्ल


सोने चले गए बच्चे
क्रिकेट खेलने वाले
चलाने वाले तिपहिया सायकिल

सोने चले गए।

जाग रहे हैं बच्चे
तश्तरियाँ-प्लेटें साफ करते
ढोते सामान
जाग रहे हैं।


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हिंदी समय में प्रयाग शुक्ल की रचनाएँ