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कविता

अनुपात
रेखा चमोली


वे रहती हैं
दिन भर व्यस्त
नापती-तौलती हैं
अनुपात
दाल और पानी का
सब्जी और मसाले का
सर्फ और कपड़ों का
झाड़ू और पोछे का
सिलेंडर, मशीन, पानी की लाइनें
और अपनी बारी का
बच्चों और स्कूल का
गृहस्थी और रिश्ते नातों का
और इस
आनुपातिक दिनचर्या में
भूल जाती हैं
कमर और दर्द का
थकान और आराम का
उम्र और कुंठाओं का
बोझ और क्षमता का अनुपात।

 


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हिंदी समय में रेखा चमोली की रचनाएँ