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कविता

नियम
विमल चंद्र पांडेय


जिस दौर में एक 'आयडिया' पाना बुनियादी जरूरत हो
पद्म पुरस्कार पाना परम उपलब्धि
और क्रिकेट श्रृंखला हारना एक राष्ट्रीय शर्म
तो मुझ पर हँसा जाना सबसे वाजिब कदम है

यदि नाम के बाद सिंह लगाने वाले लोग निडर और बहादुर होते हों
नाम के पहले पंडित लगाने वाले जानकार
तो सर्वे भवंतु सुखिन: कहने से निश्चित तौर पर किसी भी आगामी विस्फोट को टाला जा सकता है

अगर कविता कहने के लिए साहित्य का इतिहास जानना जरूरी हो
कुछ नया करने के लिए आइंस्टीन की जीवनी याद किए बिना काम न चलता हो
और प्यार करने के लिए वात्स्यायन को पढ़ना कोई आवश्यक सूत्र हो
तो दुनिया के खत्म होने में दो घंटे से अधिक नहीं बचे हैं

मेरी आँखों के नीचे जो काले धब्बे हैं
उनका तुम्हारी याद में जागी काली रातों से कोई संबंध जरूर होगा
इसे कोई कभी विज्ञापन की लाइन न बनाए
तो कम से कम एक बात हमारे बीच में हमारी नितांत अपनी रहेगी

नियमों के बारे में जानने की कोशिश करते आधी जिंदगी बीत जाने के बाद
यह राज की बात पता चली
कि कहीं कोई नियम नहीं है
नहीं होता
नहीं होगा

 


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