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कविता

आपकी खाली जगह आपकी नहीं
विमल चंद्र पांडेय


उसमें हो सकती है थोड़ी हवा
थोड़ा सी चादर
कोई गैरजरूरी किताब
आपका थोड़ा सा दुख
या फिर कोई दूसरा चेहरा
मगर जिस जगह आप बैठा करते थे उन दिनों
वह जगह आपकी नहीं आपकी गैरहाजिरी में

समय की नंगी डाल पर जब उसी कमरे में पार्टियाँ लटक रही थीं
आपका वजूद फिसल गया था उस पल वहाँ से
फोन पर भले ही आपको कहा गया हो
'पार्टियों में तुम्हारी बहुत कमी खली'
आप समझ लें यह आपकी खुशी के लिए कही गई एक झूठी बात थी

आपकी खाली जगह में आपकी कमी कहीं थी
नहीं होती
आपकी सबसे बड़ी समस्याओं में हमेशा रहा
'क्या होगा मेरे जाने के बाद'
लेकिन जाने के बाद आपकी खाली जगहें आहिस्ता-आहिस्ता भरती गईं
किसी इंसानी चेहरे या कि किसी कुर्सी मेज तक से

देश में - दुनिया में क्या आपके मोहल्ले और यहाँ तक कि आपके घर में
चीजें बदलेंगी क्षणिक रूप से
फिर एक छोटे से समयांतराल में
डरावने ढंग से सब कुछ वैसा ही हो जाएगा
दीवारें निगल लेती हैं अनुपस्थितियाँ चुपचाप

न बदलेगा घर में चाय पिए जाने का वक्त
न पानी की टंकी भरने की चिंता
टीवी के रिमोट के लिए होने वाली मारामारी में भी कोई नहीं फर्क पड़ेगा
आपका जिक्र आते ही एक मनहूस सन्नाटा छा जाएगा माहौल में
जिसे तोड़ेगा कोर्इ हँसता हुआ
आपकी एक पुरानी मजाकिया बात याद दिलाएगा

इतना ही बचेगा आपका वजूद
आपके जाने के उपरांत
इतनी ही बचती हैं यादें विदाई के बाद
कि जीना मुहाल न करें

मुहल्ले में उसी तरह आएगा पोस्टमैन अपनी तेज आवाज में हाँक लगाता
आपके नामों की चिट्ठियों को लेकर कुछ देर का मौन पसरा रहेगा आसपास के घरों में
आपके जाने के काफी दिनों बाद तक नहीं रुकेंगी आपकी पत्रिकाएँ
बच्चे उसी तरह आपके घर के सामने सीखेंगे साइकिल चलाना
सब्जियों के ठेले और फेरी लगाकर चादर बेचने वालों की हाँक वैसी ही रहेगी

आपके पुराने मित्र सबसे ज्यादा याद करेंगे आपको
शुरू में आपके लिए एक जगह और शायद एक गिलास भी रखी जाएगी
धीरे-धीरे आप यादों के एल्बम में एक तस्वीर बन जाएँगे
आपका अंजाम देखने के बाद भी सब व्यस्त रहेंगे अपनी दुनिया में
वही पुरानी दुनिया की सबसे आश्वस्तिकारक बात सोचते हुए
उनके न रहने पर बहुत असंतुलन हो जाएगा दुनिया में

इसके सुंदर होने का राज यही है
झूठी आश्वस्तियों पर भरोसा करते हैं हम
ऐसे ही खूबसूरत बनी रहेगी ये दुनिया
आने-जाने की आवृत्तियों के बीच
उम्मीदें बची रहेंगीं।

 


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