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कविता

रेंगना
विमल चंद्र पांडेय


रेंगना
अगर बहुत अच्छी बात है
तो बना दीजिए मेरे कमरे में रेंग रही छिपकली को प्रधानमंत्री
अरे नहीं ! क्षमा करें
गलत उदाहरण के साथ किसी कानून का उल्लंघन कर रही उपरोक्त पंक्तियों को रद्द समझा जाए
कविता अब फिर से

रेंगना अगर बहुत अच्छी बात है
तो भी मैं इतना संतुष्ट हूँ अपनी तुच्छ बातों में कि चाह कर भी नहीं भाग ले सकता इसमें
अपने हजारों सालों की सभ्यता में हमने जिस गुण का सबसे अधिक अभ्यास किया है
वह अब हमारी सबसे बड़ी ताकत बन कर उभरा है
रेंगने में हमारा कोई सानी नहीं
रेंग कर हम भेद सकते हैं अभेद्य से अभेद्य किले
पहुँच सकते हैं खतरनाक से खतरनाक लक्ष्यों तक
किसी भी समय में फैल सकते हैं अचानक छाए काले बादल की तरह

हम उसे शामिल नहीं करते अपने अदृश्य समूह में जो रेंग नहीं सकता
हमारे समूहों में वे शामिल हैं जिन्हें अपने शरीर को मोड़ने की कला सीखी है
जिन्हें अपनी हड्डियाँ फना करने में महारत हासिल है
इस अभ्यास के साथ कर रहे हैं आप अभ्यास एक सफल सुदीर्घ जीवन का
मेरी शुभकामनाएँ हैं आपके साथ
ऐसा नहीं कि मैंने कोशिश नहीं की आप जैसा होने की
सफल होना किसे अच्छा नहीं लगता
लेकिन दोष मेरे पुरखों का कहिए या फिर उस गाढ़े खून का
जो हड्डियों का काम करता रहा जम कर
जब भी मैंने अपनी हड्डियाँ गला कर पूरा झुक जाने की कोशिश की

फिर मैंने चुन लिया अपने लिए एक असफल जीवन
हड्डियों का साबुत बच जाना मुझे सफल होने से बड़ी उपलब्धि लगी जीवन की
तो मैं इस बात पर खुश हो सकता हूँ कि मुझे नहीं करनी अपनी वसीयत की चिंता

इस युग में आप या तो अपनी हड्डियाँ बचा सकते हैं गल जाने से
या फिर कोई बड़ा खजाना छोड़ सकते हैं अपनी संतानों के लिए

अब मैं निःसंकोच कह सकता हूँ कि प्रधानमंत्री भ्रष्टाचारी हैं
प्रोफेसर साहब अपढ़ हैं और जो पुरस्कार उस सुंदर लेखक को मिला है
वह सिर्फ अच्छे संबंधों की बदौलत है
मैं यह बात पूरे होशोहवास में अपनी हड्डियों को हाजिर नाजिर जान कर कह रहा हूँ
मुझे नहीं चाहिए सरकार से सुरक्षा
पीठों से पुरस्कार
ज्यूरी से नौकरी
मैं बस अपनी हड्डियों के साथ शांति से जीना चाहता हूँ
कम से कम तब तक
जब तक इतना कुछ कहने के बाद यह सरकार जिंदा रहने दे

 


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