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बाल साहित्य

श्रम करने पर रुपये मिलते
प्रभुद‌याल‌ श्रीवास्त‌व‌


घर में रुपये नहीं हैं पापा,
चलो कहीं से क्रय कर लाएँ।
सौ रुपये कितने में मिलते,
मंडी चलकर पता लगाएँ।

यह तो पता करो पापाजी,
पाँच रुपये कितने में आते,
एक रुपये की कीमत क्या है,
क्यों इसका न पता लगाते।

नोट पाँच सौ का लेना हो,
तो हमको क्या करना होगा।
दस का नोट खरीदेंगे तो,
धन कितना व्यय करना होगा।

पापा ‍‍बोले बाजारों में,
रुपये नहीं बिका करते हैं।
रुपये के बल पर दुनिया के,
सब बाजार चला करते हैं।

श्रम शक्ति के व्यय करने पर,
रुपये हमको मिल जाते हैं।
कड़े परिश्रम के वृक्षों पर,
रुपये फूलकर फल जाते हैं।

 


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