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कविता

अनुत्तरित
कलावंती


जानती हूँ
पूछ रही हूँ जो तुमसे
वह अनुत्तरित है युगों से ही
फिर भी पूछना मेरी विवशता है
और
उत्तरहीनता तुम्हारी

 


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हिंदी समय में कलावंती की रचनाएँ