डाउनलोड मुद्रण

अ+   अ-

कविता

अस्तित्व
कलावंती


अस्तित्व की खोज
और सार्थकता के नाम पर,
हम आ पहुँचे शाब्दिक प्रपंचों के चक्रव्यूह में
आज का अर्जुन,
भटक गया है पृष्ठजाल में
आज का कृष्ण स्वयं दिगभ्रमित है।
हम भूल जाते हैं कि कुरुक्षेत्र के
बाद ही लिखा गया था महाभारत।

 


End Text   End Text    End Text

हिंदी समय में कलावंती की रचनाएँ